मुस्कान को मथुरा जेल में दी जा सकती है फांसी, यूपी में महिलाओं के लिए है एकमात्र फांसी घर
मेरठ: सौरभ राजपूत हत्याकांड के चर्चित ‘नीला ड्रम’ मामले में अदालत ने मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। फैसले के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि मुस्कान को फांसी कहां दी जाएगी। मेरठ जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग के मुताबिक, कानूनी प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं आने पर मुस्कान को मथुरा जेल में फांसी दी जा सकती है। इस जेल में उत्तर प्रदेश का एकमात्र महिला फांसी घर है। हालांकि, सत्र न्यायालय से मृत्युदंड मिलने के बाद सजा पर तुरंत अमल नहीं किया जा सकता। इसके लिए उच्च न्यायालय की पुष्टि और अपील व दया याचिका जैसी कानूनी प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी है।
मुस्कान और साहिल को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा
मेरठ में जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। अदालत के आदेश में कहा गया कि दोनों को तब तक फांसी पर लटकाया जाए, जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए। दोनों पर कुल एक लाख 40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
बुधवार सुबह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दोनों की अदालत में पेशी हुई। इसके बाद दोनों पक्षों के वकीलों ने करीब सवा घंटे तक बहस की। शाम करीब 4:15 बजे अदालत ने मृत्युदंड का फैसला सुनाया।
मथुरा जेल में है प्रदेश का एकमात्र महिला फांसी घर
मेरठ जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने बताया कि कानूनी प्रक्रिया में कोई अड़चन नहीं आने पर मुस्कान को मथुरा जेल में फांसी दी जा सकती है। उत्तर प्रदेश में महिला कैदी के लिए फांसी घर वाली यह एकमात्र जेल है।
हालांकि, मृत्युदंड के फैसले के बाद कई कानूनी चरण पूरे होने जरूरी हैं। सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा की उच्च न्यायालय से पुष्टि कराना अनिवार्य है। दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील करने और दया याचिका दाखिल करने जैसे कानूनी विकल्प भी मिल सकते हैं। इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही सजा पर अमल को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
फैसला सुनते ही सौरभ के परिवार की आंखों से छलके आंसू
अदालत का फैसला आते ही सौरभ राजपूत के परिवार के सदस्य भावुक हो गए। उनके भाई राहुल उर्फ बबलू की आंखें नम हो गईं, जबकि मां रेणू देवी रोने लगीं। बाद में उन्होंने आसमान की ओर देखकर धन्यवाद कहा।
रेणू देवी ने बताया कि उन्होंने अदालत से दोनों दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि यदि किसी महिला को अपने पति के साथ नहीं रहना है तो वह अलग हो सकती है, लेकिन किसी की जान लेने की जरूरत नहीं है।
सौरभ के भाई बोले- हमें इंसाफ मिला
फैसले के बाद राहुल उर्फ बबलू ने कहा कि उनके भाई सौरभ और परिवार को इंसाफ मिला है। उन्होंने कहा कि मुस्कान और साहिल ने सौरभ के साथ जो किया, वैसा कोई दुश्मन भी नहीं करता। राहुल ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया।
सौरभ की बेटी के भविष्य को लेकर सवाल पूछे जाने पर राहुल ने दावा किया कि बच्ची सौरभ की नहीं, बल्कि साहिल की बेटी है। उन्होंने कहा कि बच्ची की जिम्मेदारी साहिल के परिवार को उठानी चाहिए। राहुल के मुताबिक, साहिल ने पहले कहा था कि जेल से बाहर आने के बाद वह बच्ची को अपना नाम देगा।
महिला अधिवक्ताओं ने भी की थी फांसी की मांग
सौरभ हत्याकांड में फैसले से पहले मेरठ कचहरी परिसर में महिला अधिवक्ताओं ने भी मुस्कान और साहिल के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। अधिवक्ता उर्वशी चौधरी और कोमल चौहान समेत कई महिला वकीलों ने इस मामले को बेहद गंभीर अपराध बताया।
उर्वशी चौधरी ने कहा कि महिला अधिकारों के लिए लड़ने का मतलब यह नहीं है कि किसी अपराध के मामले में महिला और पुरुष के बीच भेद किया जाए। उन्होंने कहा कि सौरभ हत्याकांड में दोषियों के साथ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
फैसले के बाद कोर्ट परिसर में लगे नारे
बुधवार को अदालत का फैसला आते ही मेरठ कचहरी परिसर में मौजूद लोगों ने भारत माता की जय और न्यायपालिका जिंदाबाद के नारे लगाए। सुनवाई के दौरान परिसर में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। भीड़ बढ़ने पर पुलिस को व्यवस्था संभालनी पड़ी।
नीला ड्रम कांड ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। अब मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी। फिलहाल, सजा की पुष्टि और अन्य कानूनी विकल्पों के निपटारे के बिना फांसी की तारीख तय नहीं मानी जा सकती।
