BMC चुनाव में उद्धव गुट की हार पर कंगना रनौत का पहला रिएक्शन, बोलीं- जिन्होंने मेरा घर गिराया, आज सत्ता से बाहर हो गए
BMC चुनाव में उद्धव ठाकरे गुट की हार पर अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे न्याय करार दिया है। कंगना ने खुशी जताते हुए कहा कि जिन लोगों ने उनका घर तोड़ा, उन्हें गालियां दीं और महाराष्ट्र छोड़ने की धमकी दी, आज वही लोग सत्ता से बेदखल हो गए हैं। मुंबई में शिवसेना (UBT) का दशकों पुराना गढ़ अब बीजेपी और शिंदे गुट के हाथ में चला गया है, जिसे कंगना ने लोकतंत्र की जीत बताया है।
BMC कार्रवाई की याद दिलाकर बोलीं कंगना
कंगना रनौत ने अपनी प्रतिक्रिया में साल 2020 की उस घटना को भी याद किया, जब मुंबई नगर प्रशासन पर शिवसेना का नियंत्रण था और बीएमसी ने उनके मुंबई स्थित बंगले से सटे कार्यालय को ध्वस्त कर दिया था। उस समय इस कार्रवाई को लेकर काफी विवाद हुआ था और यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया था। कंगना का कहना है कि जिन लोगों ने उनके साथ अन्याय किया, आज जनता ने उन्हें ही जवाब दे दिया है।
चुनावी नतीजे को बताया न्याय
कंगना रनौत के लिए भारत के सबसे अमीर नगर निकाय में बीजेपी की सत्ता में वापसी महज एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि व्यक्तिगत न्याय का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजों से उन्हें न्याय मिला है और यह फैसला महिला-विरोधी सोच, गुंडागर्दी और भाई-भतीजावाद की राजनीति के खिलाफ जनादेश है। कंगना ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने उन ताकतों को जवाबदेह ठहराया है, जो डर और धमकी की राजनीति करती थीं।
‘भगवा लहर जैसा रहा बीजेपी का प्रदर्शन’
एनडीटीवी से बातचीत में कंगना रनौत ने कहा कि बीएमसी चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन भगवा लहर के समान रहा है। उन्होंने इस सामूहिक सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महाराष्ट्र बीजेपी नेतृत्व को दिया। कंगना के मुताबिक, मुंबई में बीजेपी को मिला मजबूत जनसमर्थन इस बात का संकेत है कि जनता ने विकास और स्थिरता की राजनीति को चुना है।
एशिया का सबसे अमीर नगर निगम है BMC
बृहन्मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी सिर्फ एक स्थानीय निकाय नहीं है, बल्कि 74,400 करोड़ रुपये से अधिक के वार्षिक बजट के साथ यह मुंबई की बड़ी परियोजनाओं, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था, स्वच्छता सेवाओं और नागरिक प्रशासन की रीढ़ माना जाता है। लंबे समय से बीएमसी पर नियंत्रण को देश की वित्तीय राजधानी में राजनीतिक वर्चस्व का बड़ा प्रतीक माना जाता रहा है। यही वजह है कि बीएमसी को एशिया का सबसे अमीर नगर निगम कहा जाता है और इसके चुनावी नतीजों का राजनीतिक असर दूर तक देखने को मिलता है।
