Nepal Election: नेपाल में आधी रात से लागू हुई आचार संहिता, 5 मार्च को होंगे आम चुनाव

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काठमांडू। नेपाल में 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव से पहले चुनावी माहौल पूरी तरह औपचारिक हो गया है। चुनाव आयोग ने रविवार आधी रात से पूरे देश में आदर्श आचार संहिता लागू कर दी है, ताकि चुनाव प्रक्रिया स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त तरीके से संपन्न कराई जा सके। आयोग का कहना है कि आचार संहिता लागू होने के बाद सभी राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और सरकारी तंत्र को तय नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

चुनाव आयोग ने क्यों लिया यह फैसला
चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, यह निर्णय रविवार को हुई आयोग की बैठक में लिया गया। चुनाव आयोग अधिनियम-2073 की धारा 22 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए आचार संहिता को लागू किया गया है। आयोग का उद्देश्य चुनावी खर्च पर नियंत्रण, पारदर्शिता बनाए रखना और मतदाताओं को बिना किसी दबाव के मतदान का अवसर देना है।

मंत्रियों और अफसरों को दी जाएगी आधिकारिक सूचना
आयोग ने स्पष्ट किया है कि आचार संहिता लागू होने की जानकारी मंत्रिपरिषद के सदस्यों और शीर्ष सरकारी अधिकारियों को औपचारिक रूप से दी जाएगी। इसके बाद सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग, नई घोषणाओं और तबादलों पर रोक जैसे प्रावधान प्रभावी हो जाएंगे।

जेन-जी आंदोलन के बाद हो रहे हैं आम चुनाव
नेपाल में ये आम चुनाव उस बड़े राजनीतिक संकट के बाद कराए जा रहे हैं, जिसने देश की राजनीति को हिला दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने 9 सितंबर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे की वजह भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ जेन-जी युवाओं के नेतृत्व में हुए हिंसक प्रदर्शन बताए जाते हैं। हालात बिगड़ने के बाद 12 सितंबर को 73 वर्षीय सुशीला कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उनकी सिफारिश पर राष्ट्रपति ने प्रतिनिधि सभा को भंग कर आम चुनाव कराने का ऐलान किया था।

प्रधानमंत्री पद की दौड़ में बालेन शाह की एंट्री
नेपाल की राजनीति में इस चुनाव से पहले एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। काठमांडू महानगरपालिका के मेयर बालेन्द्र शाह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बालेन के नाम से मशहूर शाह ने 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव लड़ने के लिए यह फैसला लिया है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। उनके मैदान में उतरने से चुनावी मुकाबला और भी रोचक हो गया है। माना जा रहा है कि जेन-जी आंदोलन में उनकी भूमिका और युवाओं के बीच लोकप्रियता उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।

 

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