गट हेल्थ के लिए अमृत समान है ये देसी ड्रिंक, महंगे प्रोबायोटिक्स छोड़िए और चावल-दही से घर पर बनाएं कांजी
आजकल खराब गट हेल्थ कई तरह की दिक्कतों की जड़ बन चुकी है। पाचन से लेकर इम्यूनिटी तक, सब कुछ आंतों की सेहत पर निर्भर करता है। गट हेल्थ सुधारने के लिए प्रोबायोटिक्स को बेहद जरूरी माना जाता है, लेकिन बाजार में मिलने वाले प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स न सिर्फ महंगे होते हैं, बल्कि इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए केमिकल्स का भी इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में एक देसी और प्राकृतिक विकल्प है चावल और दही से बनी कांजी, जो गट के लिए किसी अमृत से कम नहीं मानी जाती।
घर की रसोई से मिलेगा प्रोबायोटिक्स का खजाना
फर्मेंटेड फूड्स को आंतों के स्वास्थ्य के लिए सबसे बेहतर माना जाता है। चावल और दही से तैयार की जाने वाली कांजी प्राकृतिक रूप से प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है। यह आंतों में गुड बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाने में मदद करती है, जिससे पाचन बेहतर होता है और पेट से जुड़ी समस्याओं में राहत मिल सकती है।
न्यूट्रिशन एक्सपर्ट ने बताया आसान तरीका
बेंगलुरु की न्यूट्रिशनिस्ट और योग टीचर शालिनी सुधाकर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए इस फर्मेंटेड ड्रिंक के फायदे और इसकी आसान रेसिपी साझा की है। उनके मुताबिक, महंगे प्रोबायोटिक खरीदने की बजाय घर में मौजूद चावल और दही से तैयार कांजी गट हेल्थ के लिए ज्यादा असरदार और सुरक्षित विकल्प हो सकती है।
चावल और दही से कांजी बनाने का पहला स्टेप
इस रेसिपी को बनाना बेहद आसान है और इसके लिए किसी खास या महंगे सामान की जरूरत नहीं पड़ती। सबसे पहले 2 से 3 चम्मच पके हुए चावल लें। इसमें करीब आधा कप दही मिलाएं और फिर आधा कप पानी डाल दें। अब इस मिश्रण को ढककर रातभर के लिए ऐसे ही छोड़ दें। इस दौरान चावल और दही फर्मेंट हो जाते हैं और आंतों के लिए फायदेमंद बैक्टीरिया विकसित होने लगते हैं।
दूसरा स्टेप और पीने का सही तरीका
अगली सुबह इस फर्मेंटेड मिश्रण को ब्लेंडर में डालकर अच्छी तरह पीस लें और जरूरत के हिसाब से पानी मिलाकर इसे पतला कर लें। स्वाद के लिए इसमें थोड़ा नमक और बारीक कटा प्याज भी डाला जा सकता है। इस कांजी को सुबह खाली पेट पीना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। इसे पीने से शरीर में ताजगी महसूस होती है और पाचन तंत्र को सपोर्ट मिलता है।
बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए फायदेमंद
चावल की कांजी एक हल्की और नेचुरल ड्रिंक है, जिसे बच्चे भी आसानी से पी सकते हैं। नियमित रूप से इसे डाइट में शामिल करने से गट हेल्थ को सपोर्ट मिलता है और पेट से जुड़ी छोटी-बड़ी परेशानियों में सुधार देखने को मिल सकता है।
