30 की उम्र में 50 जैसी हड्डियां! विटामिन D अकेला नहीं काफी, कैल्शियम साथ न लेने से बढ़ता है बड़ा खतरा
आजकल 30 से 40 साल की उम्र में ही लोगों को पीठ, घुटनों और कंधों में दर्द की शिकायत होने लगी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसकी बड़ी वजह हड्डियों का कमजोर होना है। हैरानी की बात यह है कि कई लोग विटामिन D की दवाएं या इंजेक्शन लेने के बावजूद इस दर्द से राहत नहीं पा रहे। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है और विटामिन D के साथ कैल्शियम न लेने से शरीर को क्या नुकसान हो सकता है।
हड्डियों की कमजोरी की असली वजह क्या है
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग से जुड़े पूर्व विशेषज्ञ डॉ. संकल्प मेहता बताते हैं कि हड्डियों की मजबूती में विटामिन D की अहम भूमिका होती है। आज की लाइफस्टाइल में लोग धूप में कम निकलते हैं, जिससे शरीर में विटामिन D की कमी हो जाती है। इस कमी को पूरा करने के लिए सप्लीमेंट तो ले लिए जाते हैं, लेकिन कई लोग यह नहीं जानते कि अगर शरीर में कैल्शियम की मात्रा कम है, तो विटामिन D भी सही तरीके से काम नहीं कर पाता।
क्यों जरूरी है विटामिन D के साथ कैल्शियम
डॉ. मेहता के अनुसार विटामिन D का काम शरीर में कैल्शियम को एब्जॉर्ब कराने में मदद करना है। अगर कैल्शियम ही कम होगा, तो विटामिन D लेने के बावजूद हड्डियों की सही मरम्मत नहीं हो पाएगी। यही वजह है कि कई लोगों को इलाज के बाद भी हड्डियों में दर्द बना रहता है। ऐसे मामलों में सिर्फ विटामिन D का टेस्ट कराना काफी नहीं होता, कैल्शियम लेवल की जांच भी जरूरी है।
कैल्शियम साथ न लेने से क्या हो सकता है नुकसान
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि विटामिन D के साथ कैल्शियम न लेने पर ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। इससे कम उम्र में ही हड्डियां पतली और कमजोर हो सकती हैं और फ्रैक्चर का जोखिम भी ज्यादा रहता है। इसके अलावा मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, थकान और लगातार बॉडी पेन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
किन लोगों को सबसे ज्यादा रहता है खतरा
जो लोग धूप में बहुत कम निकलते हैं
ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोग
ज्यादा जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड खाने वाले
महिलाएं, खासकर 30 साल की उम्र के बाद
कितना विटामिन D और कैल्शियम जरूरी है
एक्सपर्ट्स के मुताबिक वयस्कों को रोजाना लगभग 600–800 IU विटामिन D की जरूरत होती है। वहीं कैल्शियम की आवश्यकता करीब 800–1000 mg प्रतिदिन मानी जाती है, हालांकि इसकी मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।
