Nepal Elections 2026: 5 मार्च को वोटिंग, 3.38 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती; आईटी सेल भी अलर्ट मोड पर
नई दिल्ली। नेपाल में 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने अभूतपूर्व तैयारी की है। निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए इस बार पारंपरिक सुरक्षा इंतजामों के साथ-साथ आईटी सुरक्षा पर भी विशेष फोकस किया गया है। डीपफेक, भ्रामक सूचनाओं और सोशल मीडिया पर फर्जी सामग्री की निगरानी के लिए नेपाली सेना और नेपाल पुलिस ने समर्पित आईटी सेल स्थापित किए हैं।
अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के प्रेस सलाहकार राम रावल ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों ने प्रधानमंत्री को आश्वस्त किया है कि देश के चुनावी इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है।
कितने सुरक्षाकर्मी तैनात, क्या है सुरक्षा ब्लूप्रिंट
चुनाव के मद्देनजर कुल लगभग 3,38,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। इनमें से 79,727 जवान नेपाली सेना के हैं। इसके अतिरिक्त आपात स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बलों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। सुरक्षा एजेंसियों ने देशभर के 10,967 मतदान केंद्रों को जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा है।
3,680 केंद्रों को अत्यधिक संवेदनशील, 4,442 को संवेदनशील और 2,845 को सामान्य श्रेणी में रखा गया है। इन श्रेणियों के अनुसार सुरक्षा बलों की तैनाती और निगरानी व्यवस्था तय की गई है।
1.89 करोड़ मतदाता चुनेंगे 275 सदस्यीय संसद
इस चुनाव में कुल 1.89 करोड़ पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा के गठन के लिए कराया जा रहा है। नेपाल की चुनावी प्रणाली प्रत्यक्ष मतदान और समानुपातिक प्रतिनिधित्व, दोनों का मिश्रण है।
कुल 275 सीटों में से 165 सदस्यों का चयन प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली से होगा, जिसमें मतदाता अपने क्षेत्र के उम्मीदवार को सीधे वोट देते हैं। वहीं 110 सदस्यों का चुनाव समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत किया जाएगा, जिसमें पूरे देश में राजनीतिक दलों को मिले कुल वैध वोट प्रतिशत के आधार पर सीटों का आवंटन होता है।
क्यों अहम है समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली
समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली का उद्देश्य संसद में व्यापक सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करना है। इस व्यवस्था से अल्पसंख्यक और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को प्रतिनिधित्व मिलता है। छोटे राजनीतिक दल, जो प्रत्यक्ष चुनाव में बड़ी जीत हासिल नहीं कर पाते, उन्हें भी उनके वोट शेयर के आधार पर सदन में स्थान मिल सकता है।
यह प्रणाली किसी एक क्षेत्र विशेष के बजाय पूरे देश में पार्टी को मिले कुल वोटों पर आधारित होती है, जिससे राष्ट्रीय जनाधार का प्रतिबिंब संसद में दिखाई देता है। चुनावी प्रक्रिया का लक्ष्य एक ऐसी समावेशी संसद का गठन करना है, जहां समाज के हर वर्ग की आवाज प्रभावी रूप से पहुंच सके।
