नेपाल में सत्ता संग्राम: 5 मार्च के चुनाव में 3 दिग्गज PM पद की दौड़ में, ओली को टक्कर दे रहे बालेन शाह और गगन थापा

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नेपाल में जानलेवा विरोध प्रदर्शनों के बाद पहली बार 5 मार्च को आम चुनाव होने जा रहे हैं। इस चुनाव में तीन बड़े नेता प्रधानमंत्री पद की रेस में आमने-सामने हैं। इनमें एक पूर्व रैपर और काठमांडू के पूर्व मेयर, दूसरे देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के युवा चेहरा और तीसरे पूर्व प्रधानमंत्री शामिल हैं, जिन्हें पिछले साल युवाओं के हिंसक प्रदर्शनों के बाद सत्ता से हटना पड़ा था। उन प्रदर्शनों में दर्जनों लोगों की जान गई थी।

यह चुनाव पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार गिरने के बाद हो रहा पहला बड़ा राजनीतिक मुकाबला है। जो भी इस बार जीत दर्ज करेगा, वह 2008 में राजशाही खत्म होने के बाद दो दशक से कम समय में नेपाल का 16वां प्रधानमंत्री बनेगा। यह आंकड़ा हिमालयी देश में जारी राजनीतिक अस्थिरता की कहानी खुद बयां करता है।

लाखों नेपाली मतदाता संसद के ताकतवर निचले सदन, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए प्रतिनिधि चुनने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री का चुनाव इसी सदन में बहुमत के आधार पर किया जाएगा।

बालेन शाह: रैपर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार तक

35 वर्षीय बलेंद्र शाह, जिन्हें बालेन शाह के नाम से जाना जाता है, इस चुनाव में सबसे चर्चित चेहरों में हैं। वह 2022 में काठमांडू के मेयर चुने गए थे। बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री पद की दावेदारी के लिए पद छोड़ दिया।

बालेन शाह ने स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और एक रैप आर्टिस्ट के रूप में पहचान बनाई। उनके गानों में सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक खामियों पर तीखा प्रहार देखने को मिलता है।

सिग्नेचर ब्लैक ड्रेस और सनग्लासेस में नजर आने वाले शाह देशभर में प्रचार कर रहे हैं। उनके समर्थक बड़ी संख्या में रैलियों में पहुंच रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक पार्टियों के खिलाफ जनता के गुस्से को भुनाते हुए काठमांडू मेयर का चुनाव जीता था। अवैध वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई, कचरा समस्या से निपटना और सड़कों के विस्तार जैसे फैसलों के लिए उन्हें सराहना मिली, लेकिन बिना पर्याप्त नोटिस के घरों और संपत्तियों को गिराने के आदेश पर आलोचना भी झेलनी पड़ी।

गगन थापा: नेपाली कांग्रेस का युवा चेहरा

दूसरे प्रमुख दावेदार हैं गगन थापा, जो देश की सबसे पुरानी प्रमुख पार्टी नेपाली कांग्रेस के नेता हैं। 49 वर्षीय थापा लंबे समय से पार्टी का लोकप्रिय चेहरा रहे हैं। इस साल की शुरुआत में उन्होंने पार्टी नेतृत्व में चुनौती पेश कर शीर्ष पद हासिल किया।

नेपाली कांग्रेस एक लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी मानी जाती है और परंपरागत रूप से भारत के साथ करीबी संबंध रखती है। हालांकि, यह पार्टी पिछली गठबंधन सरकार का हिस्सा थी, जिसे सितंबर में युवाओं के उग्र प्रदर्शनों के बाद सत्ता छोड़नी पड़ी।

थापा का कहना है कि अगर उन्हें मौका मिला तो पांच साल के भीतर नेपाल को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना और सरकार को जनता के प्रति पूरी तरह जवाबदेह करना उनकी प्राथमिकता होगी।

केपी ओली: सत्ता में वापसी की कोशिश

तीसरे दावेदार खुद पूर्व प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद शर्मा ओली हैं, जिन्हें केपी ओली के नाम से जाना जाता है। वह एक मजबूत लेकिन विवादित कम्युनिस्ट नेता हैं। पिछले साल हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद उनकी सरकार गिर गई थी और कई लोग उन मौतों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराते हैं।

आलोचनाओं के बावजूद ओली को कम्युनिस्ट पार्टी और उसके समर्थकों का मजबूत आधार हासिल है। उनका कहना है कि नेपाल को आर्थिक विकास के लिए स्थिर नीति और राजनीतिक स्थिरता की जरूरत है।

भारत-चीन के बीच संतुलन की चुनौती

नेपाल एशिया के दो बड़े देशों भारत और चीन के बीच स्थित है, और उसकी राजनीति पर दोनों का प्रभाव माना जाता है। नेपाली कांग्रेस को पारंपरिक रूप से भारत के करीब समझा जाता है, जबकि ओली का कम्युनिस्ट गुट चीन के प्रति अधिक अनुकूल माना जाता है। ऐसे में यह चुनाव सिर्फ नेतृत्व का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन का भी अहम इम्तिहान माना जा रहा है।

 

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