असम चुनाव से पहले कांग्रेस में भगदड़: 3 महीनों में 5 दिग्गजों का इस्तीफा, बढ़ी सियासी मुश्किलें

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असम विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस पार्टी को लगातार झटके लग रहे हैं। बीते तीन महीनों में पार्टी के पांच बड़े नेताओं ने इस्तीफा देकर संगठन की स्थिति को कमजोर कर दिया है। इन इस्तीफों ने न सिर्फ चुनावी रणनीति पर असर डाला है, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी प्रभावित किया है।

प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे से बढ़ी चिंता

ताजा घटनाक्रम में नागांव से सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। पूर्व मंत्री और दो बार के सांसद रहे बोरदोलोई ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे पत्र में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा राज्य के हित को प्राथमिकता दी, लेकिन काम करने में बाधा महसूस होने पर नया रास्ता अपनाना जरूरी हो गया।

एक के बाद एक बड़े चेहरों ने छोड़ा साथ

कांग्रेस से अलग होने वाले नेताओं की सूची लगातार लंबी होती जा रही है, जिससे संगठन की अंदरूनी स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।

भूपेन कुमार बोराह, जो प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं, तीन दशक पुराना साथ छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए। उन्होंने संगठनात्मक फैसलों को लेकर असंतोष जताया।

वरिष्ठ नेता रतुल कलिता ने पार्टी पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस में केवल राजनीतिक परिवारों को प्राथमिकता दी जाती है।

पूर्व महासचिव अबुल मिया ने भी पार्टी छोड़ दी और अब रायजोर दल के साथ नई राजनीतिक पारी शुरू की है। धुबरी जिले में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

वहीं रेजाउल करीम सरकार, जो अल्पसंख्यक छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं, कांग्रेस में शामिल होने के कुछ समय बाद ही अलग हो गए।

नेतृत्व और टिकट वितरण पर उठ रहे सवाल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और टिकट वितरण को लेकर गहरा असंतोष है। खास तौर पर गौरव गोगोई की भूमिका और चुनावी रणनीति को लेकर कई नेता खुलकर नाराजगी जता चुके हैं।

चुनाव से पहले संगठन पर संकट, विरोधियों को फायदा

विशेषज्ञों के मुताबिक, भूपेन बोराह और प्रद्युत बोरदोलोई जैसे प्रभावशाली नेताओं का पार्टी छोड़ना कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक पर असर डाल सकता है। एक ओर जहां बीजेपी अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस आंतरिक कलह से जूझती नजर आ रही है।

ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में यह सियासी पलायन पार्टी के प्रदर्शन पर कितना असर डालता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

 

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