मृत्यु पंचक 2026: 6 जून से शुरू होगा पंचक काल, जानें किन कार्यों से बचने की दी जाती है सलाह

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नई दिल्ली: वैदिक ज्योतिष के अनुसार जून 2026 में मृत्यु पंचक का आरंभ 6 जून को शाम 7 बजकर 03 मिनट पर होगा, जो 11 जून की सुबह 8 बजकर 16 मिनट तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में पंचक की इस अवधि को विशेष सावधानी बरतने वाला समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों कुछ कार्यों से परहेज करने और संयमित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है।

क्या होता है मृत्यु पंचक?

ज्योतिष शास्त्र में पंचक उस समय को कहा जाता है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि के अंतर्गत आने वाले पांच विशेष नक्षत्रों में भ्रमण करता है। पंचक के अलग-अलग प्रकार बताए गए हैं, जिनमें मृत्यु पंचक को सबसे संवेदनशील माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में दुर्घटनाओं, विवादों और अनचाही घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है। इसी वजह से इस दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।

धार्मिक ग्रंथों में क्या बताया गया है?

गरुड़ पुराण समेत कई धार्मिक ग्रंथों में मृत्यु पंचक का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति का निधन इस काल में होता है, तो परिवार पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान करने का विधान बताया गया है।

हालांकि ये सभी बातें धार्मिक विश्वासों और परंपराओं पर आधारित हैं। इन्हें आस्था के दृष्टिकोण से देखा जाता है और इनके समर्थन में कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

मृत्यु पंचक में मृत्यु होने पर क्या किए जाते हैं उपाय?

शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का निधन मृत्यु पंचक के दौरान हो जाए, तो अंतिम संस्कार से पहले कुश या आटे से पांच प्रतीकात्मक पुतलियां बनाई जाती हैं। इसके बाद धार्मिक विधि-विधान के साथ उनका भी संस्कार किया जाता है।

मान्यता है कि ऐसा करने से पंचक दोष की शांति होती है और परिवार पर संभावित संकटों का प्रभाव कम होता है।

मृत्यु पंचक में किन कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मृत्यु पंचक के दौरान कुछ कार्यों को टालना शुभ माना जाता है। इनमें अनावश्यक यात्राएं, जोखिम भरे कार्य और विवाद शामिल हैं।

इस अवधि में वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने, क्रोध और झगड़ों से दूर रहने तथा बड़े फैसले सोच-समझकर लेने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा लोहे या निर्माण सामग्री का अत्यधिक संग्रह करने से भी बचने की परंपरा है।

कई लोग इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों को भी स्थगित रखना उचित मानते हैं।

विवाहित महिलाओं से जुड़ी क्या है मान्यता?

लोक परंपराओं के अनुसार मृत्यु पंचक के दौरान विवाहित महिलाओं को मायके या ससुराल की अनावश्यक यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस अवधि में उन्हें अपने स्थायी निवास स्थान पर ही रहना चाहिए।

हालांकि यह धार्मिक और सामाजिक परंपराओं से जुड़ी मान्यता है, जिसका कोई वैज्ञानिक आधार उपलब्ध नहीं है।

क्यों बरतनी चाहिए अतिरिक्त सावधानी?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मृत्यु पंचक के दौरान व्यक्ति को स्वास्थ्य, यात्रा और दैनिक गतिविधियों को लेकर अधिक सतर्क रहना चाहिए। सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना, अनावश्यक जोखिम से बचना और संयमित व्यवहार रखना लाभकारी माना जाता है।

धार्मिक दृष्टि से यह अवधि आत्मसंयम, सतर्कता और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। हालांकि इससे जुड़े सभी नियम और प्रभाव व्यक्तिगत आस्था एवं धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं।

 

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