उज्ज्वला योजना में बड़ा दावा: गरीब परिवारों को आधी कीमत पर मिल रही रसोई गैस, सरकार ने बताया अंतरराष्ट्रीय दाम से कितना अंतर

Ujjawala-Scheme-1780367355638_v

नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में एलपीजी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को लेकर बड़ा दावा किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमत जहां करीब 1200 रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई है, वहीं उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को यह सिलेंडर 613 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार इसके लिए प्रति सिलेंडर 587 रुपये की सब्सिडी दे रही है।

उज्ज्वला लाभार्थियों को मिल रही भारी राहत
मंत्रालय के अनुसार, उज्ज्वला योजना के तहत आने वाले परिवार असल में बाजार मूल्य का लगभग आधा भुगतान कर रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि सामान्य उपभोक्ताओं के लिए भी घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये के आसपास है, लेकिन उज्ज्वला लाभार्थियों को इसमें बड़ी राहत दी जा रही है। सरकार का कहना है कि यह कदम गरीब और वंचित वर्ग को सीधी आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

पड़ोसी देशों से भी सस्ती भारत की एलपीजी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में एलपीजी की कीमतें पड़ोसी देशों की तुलना में भी कम हैं। श्रीलंका में रसोई गैस की कीमत लगभग 1241 रुपये प्रति सिलेंडर, नेपाल में 1207 रुपये और पाकिस्तान में 1046 रुपये प्रति सिलेंडर बताई गई है। इस तुलना के जरिए सरकार ने दावा किया है कि भारत में घरेलू गैस उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है।

देश में एलपीजी आपूर्ति सामान्य
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में घरेलू एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की अनावश्यक खरीदारी न करें। सभी पेट्रोल पंपों और गैस वितरण केंद्रों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

अन्य ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर भी सरकार का बयान
मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि घरेलू जेट फ्यूल पर लगभग 30 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर घटता-बढ़ता रहता है। वहीं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने देश में खाद्यान्न और खाद्य तेलों की पर्याप्त उपलब्धता का भरोसा दिलाया है। गेहूं और चावल का केंद्रीय भंडार बफर मानकों से काफी अधिक बताया गया है।

उर्वरक और खाद्य आपूर्ति भी मजबूत
सरकारी बयान के अनुसार, उर्वरक आपूर्ति प्रणाली भी पूरी तरह स्थिर और मजबूत बनी हुई है। देश में आयात और घरेलू उत्पादन के जरिए पर्याप्त मात्रा में यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरक उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार ने यह भी बताया कि मई महीने में यूरिया और डीएपी का घरेलू उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ा है, जिससे कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है।

एक नज़र