DL रिन्यू कराने वालों के लिए बड़ा झटका! लखनऊ में बदले नियम, अब फेल हुए तो लाइसेंस नवीनीकरण भी अटक सकता है
लखनऊ: राजधानी में ड्राइविंग लाइसेंस नवीनीकरण और स्थायी लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब लाइसेंस की वैधता समाप्त होने के बाद समय पर नवीनीकरण नहीं कराने वाले आवेदकों को दोबारा ड्राइविंग टेस्ट देना पड़ सकता है। इसके साथ ही शहर में अत्याधुनिक ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर शुरू होने जा रहा है, जहां सेंसर और कैमरों की निगरानी में पूरी तरह तकनीक आधारित परीक्षण होगा।
राज्य सड़क परिवहन प्राधिकरण से मंजूरी मिलने के बाद ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर इसी महीने के अंत तक शुरू किए जाने की तैयारी है। नए सिस्टम के लागू होने के बाद स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने वालों को निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद आधुनिक टेस्टिंग ट्रैक पर अपनी ड्राइविंग क्षमता साबित करनी होगी। तय समय में ट्रैक पार नहीं करने वाले आवेदकों को लाइसेंस मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
अब नहीं चलेगा पुराना तरीका
नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुक कराने वाले आवेदकों को सबसे पहले ट्रांसपोर्ट नगर या देवा रोड स्थित एआरटीओ कार्यालय पहुंचना होगा। यहां आवेदन पत्रों की जांच और बायोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें परीक्षण केंद्र भेजा जाएगा।
उदेतखेड़ा मौंदा क्षेत्र में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुरूप तैयार किए गए इस केंद्र में पूरी प्रक्रिया स्वचालित होगी। ट्रांसपोर्ट नगर से नादरगंज औद्योगिक क्षेत्र होते हुए किसान पथ के जरिए करीब 20 किलोमीटर दूर यह केंद्र स्थापित किया गया है।
लर्निंग लाइसेंस धारकों के लिए भी अनिवार्य होगा टेस्ट
नई व्यवस्था के तहत लर्निंग लाइसेंस रखने वाले प्रत्येक आवेदक को स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने से पहले अनिवार्य रूप से ड्राइविंग टेस्ट देना होगा। परीक्षण में सफल होने के बाद ही स्थायी लाइसेंस जारी किया जाएगा।
वर्तमान नियमों के अनुसार पहली बार जारी होने वाला ड्राइविंग लाइसेंस अधिकतम 40 वर्ष की आयु तक वैध रहता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी आवेदक की आयु 25 वर्ष है तो उसे 15 वर्ष की अवधि के लिए लाइसेंस मिलेगा, जबकि 30 वर्ष की आयु वाले व्यक्ति को 10 वर्ष के लिए लाइसेंस जारी किया जाएगा। इसके बाद हर पांच वर्ष पर लाइसेंस का नवीनीकरण कराया जाता है।
एक साल से ज्यादा देरी पर देना होगा दोबारा टेस्ट
मोटर वाहन अधिनियम के तहत ड्राइविंग लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद एक वर्ष तक नवीनीकरण कराने पर दोबारा ड्राइविंग टेस्ट की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि यदि लाइसेंस की समाप्ति के एक साल बाद नवीनीकरण कराया जाता है तो आवेदक को फिर से ड्राइविंग टेस्ट पास करना होगा।
एआरटीओ प्रशासन के अनुसार अब ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी पूरी प्रक्रिया आधुनिक टेस्टिंग ट्रैक के माध्यम से संचालित की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
पहले सिम्युलेटर पर प्रशिक्षण, फिर होगा असली परीक्षण
चार पहिया या भारी वाहन का लाइसेंस लेने वाले आवेदकों को पहले सिम्युलेटर पर करीब पांच मिनट का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस चरण में सफल होने के बाद उन्हें स्वचालित ट्रैक पर वास्तविक परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।
ट्रैक में प्रवेश के लिए सेंसर युक्त गेट लगाए गए हैं। दोपहिया वाहनों के लिए अलग ट्रैक तैयार किया गया है, जबकि कार और ट्रक के लिए संयुक्त ट्रैक बनाया गया है। आवेदकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे ट्रैक को सफलतापूर्वक पार करना होगा।
सेंसर और कैमरों की निगरानी में होगी हर गतिविधि
परीक्षण ट्रैक पर पैरलल पार्किंग, चढ़ाई और रिवर्सिंग जैसे महत्वपूर्ण ड्राइविंग कौशलों की जांच की जाएगी। इन गतिविधियों के लिए सीमित समय निर्धारित किया गया है। पूरे ट्रैक पर अत्याधुनिक सेंसर और ऊंचाई पर लगे कैमरे लगातार निगरानी करेंगे।
यदि परीक्षण के दौरान कोई गलती होती है तो सेंसर तुरंत संकेत देगा और कैमरों में पूरी गतिविधि रिकॉर्ड हो जाएगी। निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरने वाले आवेदकों को लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा।
मैनुअल सिस्टम पर लगती रही थीं शिकायतें
अब तक ट्रांसपोर्ट नगर और देवा रोड स्थित कार्यालयों में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए मैनुअल परीक्षण किया जाता था। समय-समय पर इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और पारदर्शिता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। नई स्वचालित व्यवस्था के लागू होने से परीक्षण प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष और तकनीक आधारित बनाने का दावा किया जा रहा है।
