‘मुझसे ज्यादा ताकतवर कोई नहीं’, ईरान समझौते पर ट्रंप का बड़ा दावा; युद्ध टलने और परमाणु कार्यक्रम रोकने की कही बात

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एवियन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए हालिया समझौते को अपनी सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलताओं में से एक बताते हुए दावा किया है कि इस कदम ने मध्य पूर्व में संभावित बड़े युद्ध को टाल दिया। जी7 शिखर सम्मेलन के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में ट्रंप ने कहा कि इस समझौते के जरिए अमेरिका अपने प्रमुख रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने में सफल रहा है।

ट्रंप ने कहा कि यदि यह समझौता नहीं होता तो क्षेत्र में लंबे समय तक सैन्य कार्रवाई जारी रह सकती थी। उनके मुताबिक इससे न केवल खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी गंभीर असर पड़ता। उन्होंने दावा किया कि समझौते ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा सामान्य संचालन की दिशा में बढ़ाने में मदद की है।

समझौते को शेयर बाजार और तेल कीमतों से जोड़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस समझौते को वैश्विक आर्थिक स्थिरता से भी जोड़ा। उनका कहना था कि जब-जब शांति और समझौते की संभावना मजबूत हुई, तब-तब निवेशकों का भरोसा बढ़ा और शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख देखने को मिला। उन्होंने कहा कि बाजारों ने हर बार कूटनीतिक समाधान के संकेतों पर उत्साहजनक प्रतिक्रिया दी।

आलोचकों को दिया जवाब

ट्रंप ने उन आलोचकों की टिप्पणियों को भी खारिज किया जो ईरान पर सैन्य दबाव बनाए रखने की वकालत कर रहे थे। उन्होंने अपने पिछले फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका ने आवश्यकता पड़ने पर कठोर कदम उठाने की क्षमता दिखाई है।

इसी दौरान ट्रंप ने कहा, “मुझसे ज्यादा ताकतवर कोई नहीं था।” उन्होंने 2020 में ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी के खिलाफ की गई कार्रवाई और ईरान की सैन्य एवं परमाणु सुविधाओं पर हालिया हमलों का भी जिक्र किया।

परमाणु हथियारों पर रोक का दावा

ट्रंप ने दावा किया कि समझौते के तहत ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने और न ही हासिल करने पर सहमति जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया गया तो अमेरिका कड़ा रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेगा।

उन्होंने कहा कि ईरान को मिलने वाली आर्थिक राहत भी उसके व्यवहार और समझौते के प्रति प्रतिबद्धता पर निर्भर करेगी। ट्रंप के अनुसार विदेशी निवेश के लिए रास्ते खुले रह सकते हैं, लेकिन अमेरिका स्वयं कोई वित्तीय सहायता देने की योजना नहीं बना रहा है।

एमओयू को बताया अहम कदम

अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि यह व्यवस्था एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) के रूप में है, लेकिन इसे उन्होंने बेहद महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि यह दस्तावेज क्षेत्र में स्थिरता और भविष्य की बातचीत के लिए आधार तैयार करेगा।

अमेरिकी मीडिया ने भी किया विश्लेषण

अमेरिकी मीडिया की विभिन्न रिपोर्टों में इस समझौते को सैन्य टकराव से कूटनीतिक समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी प्रशासन भविष्य में संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका को ही समझौते के अनुपालन का प्रमुख दबाव मानकर चल रहा है।

कुछ रिपोर्टों में इसे ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की प्रमुख विदेश नीति पहलों में शामिल बताया गया है। वहीं यह भी कहा गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य स्थिति बहाल होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

मध्य पूर्व में बड़े समझौते की उम्मीद

ट्रंप ने उम्मीद जताई कि यह समझौता केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में व्यापक शांति और सहयोग की दिशा में पहला कदम साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई नेताओं के साथ बातचीत में उन्होंने इस समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता की नई शुरुआत के रूप में प्रस्तुत किया है।

 

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