G7 में ट्रंप के बगल में क्यों बैठे पीएम मोदी? जानिए कैसे तय होती है नेताओं की सीट, फोटो से लेकर टेबल तक होता है खास प्रोटोकॉल

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एवियन। फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान एक तस्वीर ने दुनियाभर का ध्यान अपनी ओर खींचा। आउटरीच सत्र में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बिल्कुल बगल में बैठे नजर आए। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि आखिर ऐसे वैश्विक मंचों पर नेताओं की बैठने की जगह कैसे तय की जाती है और इसके पीछे कौन-सा कूटनीतिक प्रोटोकॉल काम करता है।

जी7 जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में सीटिंग अरेंजमेंट केवल औपचारिकता नहीं होती, बल्कि इसे कूटनीतिक संकेतों और वैश्विक संबंधों के नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि इसकी तैयारी कई सप्ताह पहले शुरू हो जाती है।

आउटरीच सत्र में ट्रंप के बगल में बैठे मोदी

जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित आउटरीच सत्र में सदस्य देशों के अलावा आमंत्रित राष्ट्रों के नेता भी शामिल हुए। इसी सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जर्मनी के चांसलर के बीच स्थान दिया गया। सम्मेलन की तस्वीरों में दोनों नेताओं के बीच सहज बातचीत और सकारात्मक माहौल भी देखने को मिला।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बढ़ते रणनीतिक संबंधों को देखते हुए यह बैठने की व्यवस्था प्रतीकात्मक महत्व भी रखती है।

मेजबान देश तय करता है पूरा प्रोटोकॉल

किसी भी जी7 सम्मेलन में नेताओं के बैठने का अंतिम निर्णय मेजबान देश करता है। इस बार सम्मेलन की मेजबानी फ्रांस ने की थी, इसलिए एजेंडा से लेकर सीटिंग प्लान तक सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी भी उसी की थी।

हालांकि इस प्रक्रिया में कूटनीतिक संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि किसी देश को अधिक या कम महत्व मिलने का संदेश न जाए।

मेजबान देश का नेता रहता है केंद्र में

जी7 बैठकों में आमतौर पर मेजबान देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री को सबसे प्रमुख स्थान दिया जाता है। गोल या अंडाकार मेज पर आयोजित बैठकों में भी मेजबान नेता केंद्रीय भूमिका में दिखाई देता है। इसका उद्देश्य सम्मेलन संचालन को सुचारु रखना होता है।

अंग्रेजी वर्णमाला के आधार पर भी तय होती हैं सीटें

जी7 सदस्य देशों के नेताओं को कई बार उनके देशों के अंग्रेजी नामों के वर्णक्रम के अनुसार भी बैठाया जाता है। इससे वरिष्ठता या शक्ति के आधार पर किसी तरह का विवाद उत्पन्न नहीं होता और सभी देशों के बीच समानता का संदेश जाता है।

गोल मेज का भी होता है खास संदेश

जी7 की अधिकांश बैठकों में गोल या अंडाकार मेज का उपयोग किया जाता है। इसका प्रतीकात्मक अर्थ यह होता है कि सभी सदस्य देश बराबर हैं और किसी को भी विशेष रूप से ‘हेड ऑफ द टेबल’ का दर्जा नहीं दिया गया है।

अतिथि देशों को कैसे मिलती है जगह?

भारत, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया और अन्य आमंत्रित देशों के नेताओं को मेजबान देश द्वारा निर्धारित स्थान दिया जाता है। आमतौर पर उन्हें प्रमुख सदस्य देशों के बीच या उनके निकट बैठाया जाता है ताकि वे चर्चा में सक्रिय भागीदारी कर सकें।

भारत जैसे महत्वपूर्ण साझेदार देशों के नेताओं को अक्सर ऐसी सीट दी जाती है, जहां से वे प्रमुख चर्चाओं और निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें।

फैमिली फोटो के लिए अलग होता है प्रोटोकॉल

जी7 की सामूहिक तस्वीर, जिसे ‘फैमिली फोटो’ कहा जाता है, उसके लिए भी अलग प्रोटोकॉल लागू होता है। इसमें मेजबान देश का नेता आमतौर पर बीच में खड़ा होता है, जबकि अन्य नेताओं की स्थिति कूटनीतिक संतुलन, वर्णक्रम और विशेष महत्व को ध्यान में रखकर तय की जाती है।

इस बार की समूह तस्वीर में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रमुख नेताओं के करीब स्थान मिला, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया।

हफ्तों पहले शुरू हो जाती है तैयारी

जी7, जी20, नाटो और संयुक्त राष्ट्र जैसे बड़े वैश्विक मंचों पर सीटिंग प्लान तैयार करने के लिए प्रोटोकॉल अधिकारी कई सप्ताह पहले से काम शुरू कर देते हैं। कौन किसके बगल में बैठेगा, किसे मेजबान के दाएं या बाएं स्थान मिलेगा और फोटो में किसे प्रमुख जगह दी जाएगी, इन सभी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा होती है।

सीट नहीं, कूटनीति का संदेश होती है व्यवस्था

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में किसी नेता की सीट की स्थिति को भी एक संदेश के रूप में देखा जाता है। इसलिए सीटिंग अरेंजमेंट केवल कुर्सियां लगाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील हिस्सा माना जाता है। यही कारण है कि जी7 जैसे मंचों पर हर सीट के पीछे एक रणनीतिक सोच और प्रोटोकॉल काम करता है।

 

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