अग्निवीरों के परिवारों को मिल सकता है बड़ा सहारा, एक नौकरी या पेंशन में से किसी एक सुविधा पर विचार
नई दिल्ली: देश की रक्षा के दौरान जान गंवाने वाले अग्निवीरों के परिवारों के लिए सरकार जल्द बड़ा फैसला ले सकती है। रक्षा मंत्रालय संसदीय समिति की उस सिफारिश पर गंभीरता से विचार कर रहा है, जिसमें ड्यूटी या युद्ध के दौरान जान गंवाने वाले अग्निवीरों के परिजनों को नियमित सैनिकों के परिवारों की तरह कुछ सुविधाएं देने की बात कही गई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रस्ताव पर फैसला कब तक होगा और अंतिम रूप से कौन सी सुविधा दी जाएगी।
अग्निवीर परिवारों के लिए क्या हो सकता है ऐलान?
मौजूदा व्यवस्था के तहत ड्यूटी या संघर्ष के दौरान जान गंवाने वाले अग्निवीरों को दो अलग-अलग योजनाओं के तहत कुल एक करोड़ रुपये की बीमा राशि मिलती है। इसके अलावा उनके परिवारों के लिए नियमित सैनिकों के समान पेंशन या नौकरी जैसी सुविधाओं का प्रावधान नहीं है।
रक्षा मंत्रालय से संबंधित संसद की स्थायी समिति ने अपनी सिफारिश में कहा था कि देश के लिए जान गंवाने वाले अग्निवीरों के परिवारों के लिए भी सरकार को कुछ व्यवस्था करनी चाहिए। समिति ने नियमित सैनिकों के परिजनों को मिलने वाली सुविधाओं की तर्ज पर अग्निवीरों के परिवारों को भी सहायता देने पर विचार करने की सिफारिश की थी।
नौकरी या पेंशन में से मिल सकती है एक सुविधा
युद्ध या ड्यूटी के दौरान नियमित सैनिक की मृत्यु होने पर उसके परिवार को पेंशन के साथ कुछ मामलों में परिवार के एक सदस्य को नौकरी भी दी जाती है। संसदीय समिति का मानना है कि अग्निवीरों के परिवारों को भी इनमें से कोई एक सुविधा मिलनी चाहिए, ताकि सैनिक की मृत्यु के बाद परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सके।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार समिति की इस सिफारिश को गंभीरता से देख रही है। आने वाले समय में अग्निवीरों के परिवारों को पेंशन या परिवार के किसी सदस्य को नौकरी में से किसी एक सुविधा का लाभ देने का फैसला हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
चार साल की सेवा, सेवानिवृत्ति लाभ का प्रावधान नहीं
अग्निपथ योजना के तहत युवाओं की सेनाओं में चार साल की अवधि के लिए अग्निवीर के तौर पर भर्ती होती है। योजना के तहत सेवा पूरी होने के बाद अग्निवीरों को नियमित सैनिकों की तरह सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभ नहीं मिलते। युद्ध में मारे गए अग्निवीरों को भी शहीद सैनिक का दर्जा और उससे जुड़े लाभ नहीं मिलते हैं। मौजूदा व्यवस्था में उन्हें बीमा राशि दिए जाने का प्रावधान है।
अग्निपथ योजना को शुरू हुए चार साल पूरे होने वाले हैं। इस समय तीनों सेनाओं में करीब डेढ़ लाख अग्निवीर कार्यरत हैं। इनमें थल सेना में करीब 1.25 लाख अग्निवीर तैनात हैं। तीनों सेनाओं में हर साल 45 से 50 हजार अग्निवीरों की भर्ती होती है। अब तक करीब दो दर्जन अग्निवीर ड्यूटी के दौरान जान गंवा चुके हैं।
उत्तर प्रदेश में 17 अगस्त से अग्निवीर भर्ती रैलियां
उत्तर प्रदेश के छह जिलों में 17 अगस्त 2026 से अग्निवीर भर्ती रैलियों का आयोजन शुरू होगा। ये भर्ती रैलियां अगले साल 14 अप्रैल तक चलेंगी। इसे लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस पी गोयल की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में भर्ती स्थलों पर अभ्यर्थियों के आवागमन, पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा, सुरक्षा और यातायात की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए।
किस शहर में कब होगी भर्ती रैली?
मेरठ में अग्निवीर भर्ती रैली 17 अगस्त से 9 सितंबर 2026 तक आयोजित होगी। इसके बाद बरेली में 14 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक भर्ती रैली होगी।
लखनऊ में 11 जनवरी से 28 जनवरी 2027, वाराणसी में 2 फरवरी से 27 फरवरी 2027, आगरा में 4 मार्च से 24 मार्च 2027 और अयोध्या में 29 मार्च से 14 अप्रैल 2027 तक अग्निवीर भर्ती रैलियां आयोजित की जाएंगी।
