त्योहारी सीजन से पहले सरकार का बड़ा फैसला, LPG उत्पादन बढ़ाने के सख्त निर्देश; सिलेंडर की किल्लत रोकने की तैयारी

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आगामी त्योहारी और शादी के सीजन को देखते हुए देश में एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए उत्पादन बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। सरकार ने सरकारी और निजी क्षेत्र की 21 कंपनियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के सख्त निर्देश दिए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच आयात प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

13 अगस्त के निर्देश में उत्पादन बढ़ाने पर जोर

13 अगस्त को जारी सरकारी सूचना के मुताबिक निजी और सरकारी रिफाइनरियों के साथ तेल एवं गैस उत्पादक कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए सभी तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव उपाय करने को कहा गया है। इसके तहत नेफ्था को एलपीजी में बदलने जैसे वैकल्पिक तरीकों को भी अपनाने का निर्देश दिया गया है।

त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग को पूरा करने की तैयारी

युद्ध शुरू होने से पहले देश की घरेलू रिफाइनरियां प्रतिदिन करीब 36,000 टन एलपीजी का उत्पादन करती थीं। सितंबर से शुरू होने वाले पारंपरिक त्योहारी सीजन और नवंबर में दिवाली के दौरान मांग बढ़ने की संभावना रहती है। इसे देखते हुए घरेलू रिफाइनरियों ने उत्पादन बढ़ाकर करीब 54,000 टन प्रतिदिन कर दिया है।

अब सरकार चाहती है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर उद्योग की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 63,810 टन प्रतिदिन तक पहुंच जाए। सरकारी निर्देश में प्रत्येक रिफाइनरी के लिए अलग-अलग उत्पादन लक्ष्य भी तय किए गए हैं।

रिलायंस को सबसे बड़ा उत्पादन लक्ष्य

रिलायंस इंडस्ट्रीज की घरेलू बाजार पर केंद्रित इकाई को 18,000 टन प्रतिदिन का सबसे बड़ा लक्ष्य दिया गया है। हालांकि, कंपनी की निर्यात केंद्रित विशेष आर्थिक क्षेत्र रिफाइनरी को इस लक्ष्य से छूट दी गई है।

इसके अलावा सरकारी कंपनियों ओएनजीसी, ऑयल इंडिया और राष्ट्रीय गैस पाइपलाइन कंपनी गेल को भी कुल राष्ट्रीय उत्पादन लक्ष्य का करीब दसवां हिस्सा पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई है।

एलपीजी जरूरत का 66 फीसदी हिस्सा आयात से आता है

भारत अपनी कुल एलपीजी खपत का करीब 66 फीसदी हिस्सा आयात करता है। इसमें लगभग 90 फीसदी आपूर्ति फारस की खाड़ी के रास्ते भारत पहुंचती है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी अनिश्चितता के कारण समुद्री आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

मध्य पूर्व में युद्ध शुरू होने के बाद आपूर्ति बाधित होने पर भारत में एलपीजी की भारी कमी पैदा हो गई थी। उस दौरान कई हफ्तों तक लोगों को बायोमास और मिट्टी के तेल जैसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले विकल्पों का इस्तेमाल करना पड़ा था।

दूसरे देशों से आयात करना आसान विकल्प नहीं

रेटिंग एजेंसी आईसीआरए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ के मुताबिक, लंबे समय तक चले युद्ध के कारण सरकार घरेलू एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने पर जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से वैकल्पिक आपूर्ति हासिल करने में काफी समय लगता है। इसके अलावा ऐसी आपूर्ति महंगी पड़ती है और इसके लिए कई महीने पहले से तैयारी करनी होती है।

 

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