जन्माष्टमी पर धनिया पंजीरी का ही क्यों लगता है भोग? धार्मिक मान्यता के साथ सेहत से भी जुड़ा है खास कनेक्शन

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नई दिल्ली: जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण को लगाए जाने वाले भोग में धनिया पंजीरी का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण को धनिया की पंजीरी प्रिय है, इसलिए जन्माष्टमी के दिन इसका भोग लगाया जाता है। खास बात यह है कि धनिया पंजीरी का संबंध केवल धार्मिक परंपरा से नहीं है, बल्कि इसे सेहत के लिहाज से भी लाभकारी माना जाता है।

सूखे धनिया के बीज, देसी घी और सूखे मेवों से तैयार होने वाली धनिया पंजीरी स्वादिष्ट होने के साथ कई पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसे बनाना भी काफी आसान है। आइए जानते हैं धनिया पंजीरी के फायदे और इसे तैयार करने का आसान तरीका।

पाचन के लिए मानी जाती है फायदेमंद

आयुर्वेद के अनुसार धनिया पाचन तंत्र के लिए लाभकारी माना जाता है। यह पेट की जलन, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी परेशानियों में मदद कर सकता है। इससे पाचन अग्नि को संतुलित रखने और भोजन को आसानी से पचाने में सहायता मिलने की बात कही जाती है।

देसी घी और मेवों से बढ़ती है पौष्टिकता

धनिया पंजीरी में देसी घी और सूखे मेवों का इस्तेमाल किया जाता है। देसी घी पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है। इसमें मौजूद वसा शरीर के लिए ऊर्जा का स्रोत होती है। वहीं सूखे मेवों में मौजूद पोषक तत्व और विटामिन शरीर को ऊर्जा देने में सहायक होते हैं।

रक्त शर्करा को नियंत्रित रखने में मदद

धनिया पंजीरी में आटे की जगह सूखे धनिया के बीजों का इस्तेमाल किया जाता है। धनिया का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम बताया जाता है, इसलिए इसे रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में मददगार माना जाता है। हालांकि, पंजीरी में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री और इसकी मात्रा भी महत्वपूर्ण होती है।

शरीर की सूजन कम करने में सहायक

धनिया में एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण पाए जाते हैं। ये शरीर में होने वाली सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसी वजह से धनिया से बनी पंजीरी को सेहत के लिहाज से भी उपयोगी माना जाता है।

धनिया पंजीरी बनाने की आसान विधि

धनिया पंजीरी बनाने के लिए सूखे धनिया के बीज, देसी घी और पसंद के सूखे मेवों की जरूरत होती है। सबसे पहले धनिया के बीजों को अच्छी तरह भूनकर ठंडा करें और फिर उन्हें पीस लें। इसके बाद देसी घी में मेवों को हल्का भूनें। अब पिसे हुए धनिया को इसमें मिलाकर अच्छी तरह भूनें। स्वाद के अनुसार इसमें मिठास के लिए उपयुक्त सामग्री मिलाई जा सकती है। मिश्रण के अच्छी तरह तैयार होने के बाद इसे ठंडा करें और जन्माष्टमी के भोग के रूप में भगवान कृष्ण को अर्पित करें।

 

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