बांके बिहारी से अलग है मथुरा का ये मंदिर, कृष्ण संग राधा नहीं इस भक्त की होती है पूजा; 500 साल पुराना है इतिहास

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नई दिल्ली: जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों में आमतौर पर उनके साथ राधारानी के दर्शन होते हैं, लेकिन मथुरा में एक ऐसा मंदिर भी है जहां श्रीकृष्ण के साथ राधा नहीं, बल्कि उनकी परम भक्त कुब्जा विराजमान हैं। करीब 500 साल पुराना श्रीकृष्ण-कुब्जा मंदिर अपनी अनोखी मान्यता और पौराणिक कथा के लिए जाना जाता है।

श्रीकृष्ण के साथ कुब्जा की होती है पूजा
मथुरा के परिक्रमा मार्ग पर स्थित इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के साथ कुब्जा की प्रतिमा स्थापित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कुब्जा मथुरा के राजा कंस की दासी थीं। शारीरिक बनावट को लेकर उन्हें समाज में तिरस्कार और लोगों के उपहास का सामना करना पड़ता था। यही वजह है कि इस मंदिर की कहानी भगवान कृष्ण और उनकी भक्त के बीच विशेष संबंध से जुड़ी मानी जाती है।

कान्हा के स्पर्श से बदल गई कुब्जा की काया
पौराणिक कथा के मुताबिक, जब भगवान श्रीकृष्ण मथुरा आए तो रास्ते में उनकी नजर कुब्जा पर पड़ी। कृष्ण ने उन्हें ‘सुंदरी’ कहकर संबोधित किया। लंबे समय से लोगों के ताने सुनने वाली कुब्जा को लगा कि शायद कृष्ण भी उनका मजाक उड़ा रहे हैं और वह दुखी होकर रोने लगीं।

मान्यता है कि भक्त की पीड़ा देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीला दिखाई। उन्होंने कुब्जा के पैर पर अपना पैर रखा और हाथों से उनके चेहरे को ऊपर उठाया। इसके बाद उनकी झुकी हुई कमर सीधी हो गई और उनका रूप सुंदर युवती में बदल गया। इस घटना के बाद कुब्जा भगवान कृष्ण की परम भक्त मानी गईं।

त्वचा संबंधी परेशानियों को लेकर भी मान्यता
श्रीकृष्ण-कुब्जा मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं के बीच एक और मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि यहां दर्शन करने और मंदिर के जल से स्नान करने से त्वचा संबंधी परेशानियों से राहत मिलती है। इसी विश्वास के चलते दूर-दूर से श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। हालांकि, यह धार्मिक मान्यता है, इसे चिकित्सकीय उपचार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

मथुरा के परिक्रमा मार्ग पर है मंदिर
श्रीकृष्ण-कुब्जा मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में प्रसिद्ध परिक्रमा मार्ग पर स्थित बताया जाता है। मथुरा पहुंचने के बाद परिक्रमा मार्ग के जरिए मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। जन्माष्टमी के दौरान मथुरा आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से खास आकर्षण माना जाता है।

 

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