शारदीय नवरात्र में ऐसे करें मां दुर्गा की षोडशोपचार पूजा, जीवन की बाधाओं से मिलेगी मुक्ति
नई दिल्ली: शारदीय नवरात्र के पावन पर्व पर मां दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु मां के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र में मां दुर्गा की षोडशोपचार पूजा करने से सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। षोडशोपचार पूजा में देवी की सोलह प्रकार की सामग्री और विधियों से पूजा-अर्चना की जाती है।
मां दुर्गा की षोडशोपचार पूजा में शामिल हैं ये 16 चरण
षोडशोपचार पूजा की शुरुआत मां दुर्गा के ध्यान और आवाहन से की जाती है। सबसे पहले देवी को पूजा स्थल पर आने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इसके बाद मां को आसन अर्पित कर विधिपूर्वक विराजमान किया जाता है।
इसके बाद पाद्य के रूप में देवी के चरणों को जल अर्पित किया जाता है और अर्घ्य देकर उनका स्वागत किया जाता है। आचमन के लिए जल अर्पित करने के बाद मां दुर्गा को शुद्ध जल या पंचामृत से स्नान कराया जाता है।
स्नान के बाद देवी को नए वस्त्र या चुनरी अर्पित की जाती है। इसके बाद यज्ञोपवीत यानी जनेऊ चढ़ाया जाता है। मां दुर्गा को चंदन, गंध और सिंदूर अर्पित करने के बाद ताजे फूलों की माला चढ़ाई जाती है।
पूजा के अगले चरण में देवी को धूप और दीप दिखाया जाता है। इसके बाद पंचमेवा, फल, खीर और मिठाई आदि का नैवेद्य अर्पित किया जाता है। अंत में मां दुर्गा को पान और सुपारी चढ़ाकर आरती की जाती है और श्रद्धापूर्वक प्रदक्षिणा की जाती है।
षोडशोपचार पूजा के दौरान रखें इन नियमों का ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा की पूजा करते समय साधक को कुछ विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। पूजा के दौरान पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पवित्र आसन पर बैठना शुभ माना जाता है।
मां दुर्गा को लाल रंग प्रिय माना जाता है, इसलिए देवी को लाल रंग के वस्त्र या चुनरी अर्पित करने की परंपरा है। पूजा में हमेशा ताजे फूलों का ही इस्तेमाल करना चाहिए और बासी फूलों को नहीं चढ़ाना चाहिए।
नवरात्र पूजा के दौरान मन को शांत रखना चाहिए और किसी से विवाद या गलत व्यवहार से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के दिनों में संयम और ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करना भी शुभ माना जाता है।
पूजा में इन चीजों से करें परहेज
नवरात्र के दौरान घर में सात्विक वातावरण बनाए रखने की परंपरा है। इस दौरान लहसुन, प्याज, मांसाहार और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। पूजा के अंत में किसी भी तरह की भूल या त्रुटि के लिए मां दुर्गा से क्षमा प्रार्थना जरूर करनी चाहिए।
