‘रावण बुराई का प्रतीक, लेकिन हमारी रोजी-रोटी का सहारा’, पुतला बनाने वाले की बात सुन भावुक हुए लोग
कानपुर: दशहरे पर रावण दहन की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हर साल लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाते हैं और रावण के पुतले को जलते हुए देखते हैं। लेकिन इस पुतले को तैयार करने वाले कारीगरों की मेहनत और भावनाओं पर कम ही लोगों का ध्यान जाता है। कानपुर में 110 फीट ऊंचा रावण का पुतला बना रहे एक कारीगर की बात इन दिनों इंटरनेट पर लोगों का दिल छू रही है। उसका कहना है कि रावण भले ही बुराई का प्रतीक हो, लेकिन उसके परिवार की कमाई का जरिया भी है।
डेढ़ महीने की मेहनत से तैयार हो रहा 110 फीट का रावण
कानपुर के परेड मैदान में दशहरे के मौके पर रावण दहन के लिए 110 फीट ऊंचा पुतला तैयार किया जा रहा है। इसे बनाने में कारीगरों को करीब डेढ़ महीने का समय लगता है। पुतले के सिर, मुकुट और पैरों समेत हर हिस्से को तैयार करने में बारीकी और मेहनत की जरूरत होती है। कारीगर के मुताबिक, इतने बड़े पुतले को बनाने के लिए लगभग 1,000 से 1,200 बांस इस्तेमाल किए जाते हैं।
पुतले को खड़ा करना सबसे बड़ी चुनौती
कारीगर ने बताया कि रावण का पुतला तैयार करने के साथ उसे सुरक्षित तरीके से उठाकर मैदान में खड़ा करना भी बेहद मेहनत का काम है। इतने विशाल पुतले को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने और फिर खड़ा करने में काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। इस बार कानपुर के परेड मैदान में तैयार किए जा रहे रावण की एक खासियत यह भी होगी कि उसकी गर्दन गोल-गोल घूमेगी।
महीनों की मेहनत चंद सेकंड में हो जाती है राख
कारीगर की सबसे भावुक कर देने वाली बात उस समय सामने आई, जब उसने पुतले के जलने की प्रक्रिया का जिक्र किया। उसने बताया कि कई हफ्तों तक एक-एक हिस्से पर ध्यान देकर पुतला तैयार किया जाता है। हर चीज को ठीक से जोड़ने और सजाने में काफी मेहनत लगती है, लेकिन रावण दहन के दौरान यह पूरी मेहनत कुछ ही सेकंड में राख बन जाती है।
कारीगर की इसी बात ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि जिस पुतले को लोग बुराई के अंत के प्रतीक के रूप में देखते हैं, उसके पीछे कई परिवारों की मेहनत और आजीविका जुड़ी होती है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, लोगों ने जताई संवेदना
इस कारीगर का वीडियो इंस्टाग्राम पर हर्षित द्विवेदी के ‘कानपुरिया बातें’ नाम के खाते से साझा किया गया है। वीडियो के साथ बताया गया है कि इस बार कानपुर के रावण दहन में कुछ खास देखने को मिलेगा। पुतला बनाने वाले की बातें सामने आने के बाद वीडियो को लेकर लोगों में भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
कई लोगों ने टिप्पणी करते हुए कहा कि रावण के पुतले के लिए पहली बार उन्हें बुरा महसूस हुआ। वहीं, कुछ लोगों ने इस बात पर ध्यान दिलाया कि यह काम करने वाले कारीगरों की मेहनत को भी समझना चाहिए। एक उपयोगकर्ता ने लिखा कि रावण जलते-जलते भी लोगों को दो वक्त की रोटी देने का जरिया बनता है।
बारिश और मौसम के बीच भी कारीगरों को करनी पड़ती है मेहनत
लोगों ने यह भी कहा कि रावण का पुतला बनाना आसान काम नहीं है। कई बार बारिश के कारण पुतले को जलाने में परेशानी होती है, जिससे कारीगरों की मेहनत और आयोजन से जुड़ी चुनौतियां बढ़ जाती हैं। इतने बड़े पुतले को तैयार करने से लेकर उसे मैदान में खड़ा करने तक कई स्तरों पर काम करना पड़ता है।
इस वीडियो ने दशहरे की एक ऐसी तस्वीर सामने रखी है, जो आमतौर पर उत्सव की चमक-दमक के पीछे छिप जाती है। लोगों के लिए रावण दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, लेकिन पुतला बनाने वाले कारीगरों के लिए यही परंपरा उनकी मेहनत, हुनर और परिवार की आजीविका से जुड़ी है।
