लखनऊ में आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई!
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लखनऊ में जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, 46 स्थलीय सत्यापनों में 4,311 गैर-रिपोर्टेड वित्तीय लेन-देन सामने आए; हजारों रिकॉर्ड में सुधार की जानकारी
लखनऊ, 16 अक्टूबर 2026। आयकर विभाग के आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण प्रकोष्ठ, लखनऊ की ओर से शुक्रवार को आयकर भवन, अशोक मार्ग में जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वित्तीय लेन-देन की सही और समयबद्ध रिपोर्टिंग, कर नियमों के अनुपालन तथा कर चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाने के उपायों पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि कर व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता और संबंधित सूचनाओं का सही संकलन आवश्यक है।
कार्यक्रम में विशेष रूप से निर्दिष्ट वित्तीय लेन-देन (Specified Financial Transactions—SFT) की रिपोर्टिंग के महत्व पर जोर दिया गया। आयकर विभाग के अनुसार, निर्धारित वित्तीय लेन-देन की जानकारी समय पर और सही तरीके से उपलब्ध होने से कर प्रशासन को संबंधित मामलों की पहचान करने, रिकॉर्ड का सत्यापन करने और कर अनुपालन बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।
वित्तीय लेन-देन की रिपोर्टिंग पर विशेष निगरानी
आयकर विभाग का आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण प्रकोष्ठ विभिन्न प्रकार के वित्तीय लेन-देन की रिपोर्टिंग पर निगरानी रखता है। इनमें बैंकों में नकदी जमा करने और निकालने, सावधि जमा, शेयरों के आवेदन तथा अचल संपत्ति और वस्तुओं की खरीद-बिक्री से संबंधित लेन-देन शामिल हैं।
विभाग की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, निगरानी के प्रमुख क्षेत्रों में निम्नलिखित लेन-देन शामिल हैं:
– बैंकों में नकदी जमा करने और निकालने से संबंधित लेन-देन।
– सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड।
– 10 लाख रुपये से अधिक के शेयर आवेदन से संबंधित लेन-देन।
– 45 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री।
– दो लाख रुपये से अधिक मूल्य के माल की खरीद-बिक्री से संबंधित लेन-देन।
ऐसे लेन-देन की रिपोर्टिंग में किसी प्रकार की कमी या त्रुटि पाए जाने पर संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन और आवश्यक सुधार महत्वपूर्ण माना जाता है।
46 स्थलीय सत्यापनों में सामने आए 4,311 गैर-रिपोर्टेड लेन-देन
आयकर विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष लखनऊ प्रकोष्ठ ने 46 स्थलीय सत्यापन किए। इन सत्यापनों के दौरान 4,311 ऐसे वित्तीय लेन-देन सामने आए, जिनकी रिपोर्टिंग नहीं की गई थी। इन लेन-देन की कुल राशि 2,747.50 करोड़ रुपये बताई गई।
विभाग के मुताबिक, इनमें से 1,714 लेन-देन की रिपोर्टिंग बाद में विधिवत पूरी की गई। इनकी कुल राशि 1,160.75 करोड़ रुपये रही।
ये आंकड़े वित्तीय लेन-देन से संबंधित सूचनाओं के संकलन, सत्यापन और रिपोर्टिंग में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। समय पर रिपोर्टिंग होने से कर प्रशासन को वित्तीय गतिविधियों का बेहतर आकलन करने में सहायता मिलती है।
26,628 त्रुटिपूर्ण वित्तीय लेन-देन की जानकारी में किया गया सुधार
विभाग के अनुसार, सत्यापन के दौरान 26,628 त्रुटिपूर्ण वित्तीय लेन-देन भी सामने आए। इनकी कुल राशि 14,414.82 करोड़ रुपये थी।
इनमें से 17,487 लेन-देन से संबंधित जानकारी को संशोधित कर सही किया गया। इन लेन-देन की कुल राशि 9,293.06 करोड़ रुपये रही।
वित्तीय लेन-देन की रिपोर्टिंग में गलत या अधूरी जानकारी होने से संबंधित रिकॉर्ड के सत्यापन में कठिनाई हो सकती है। ऐसे मामलों में सही जानकारी दर्ज कराना और रिपोर्टिंग में सुधार करना कर अनुपालन की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बैंक ब्याज की रिपोर्टिंग में कमियां भी आईं सामने
स्थलीय सत्यापन के दौरान कुछ बैंकों की ओर से ग्राहकों को दिए गए ब्याज की रिपोर्टिंग नहीं किए जाने के मामले भी सामने आए। विभाग के मुताबिक, जांच के बाद संबंधित ब्याज की रिपोर्टिंग सुनिश्चित की गई।
बैंक ब्याज सहित अन्य वित्तीय आय से जुड़े रिकॉर्ड की सही रिपोर्टिंग कर संबंधी जानकारी के मिलान में सहायक होती है। इस तरह की कमियों की पहचान और सुधार से वित्तीय सूचनाओं की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
अचल संपत्ति के पंजीकरण में पैन का उल्लेख अनिवार्य
आयकर विभाग के अनुसार, कर आधार का विस्तार करने और वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रदेश में अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री के पंजीकरण में स्थायी खाता संख्या (PAN) का उल्लेख अनिवार्य किया गया है।
पैन के माध्यम से संपत्ति से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की पहचान और संबंधित सूचनाओं का मिलान करने में मदद मिल सकती है। विभाग का उद्देश्य वित्तीय लेन-देन से संबंधित सूचनाओं का बेहतर संकलन करना और कर नियमों के अनुपालन को प्रोत्साहित करना है।
कर आधार बढ़ाना और पारदर्शिता मजबूत करना अभियान का उद्देश्य
आयकर विभाग के आसूचना एवं आपराधिक अन्वेषण प्रकोष्ठ का प्रमुख उद्देश्य वित्तीय लेन-देन की रिपोर्टिंग में सुधार, कर आधार का विस्तार और कर अनुपालन को मजबूत करना है। इसके तहत रिपोर्टिंग संबंधी कमियों की पहचान, स्थलीय सत्यापन और संबंधित रिकॉर्ड में सुधार पर जोर दिया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, समयबद्ध रिपोर्टिंग और वित्तीय सूचनाओं की सटीकता से कर प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलती है। जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से संबंधित संस्थानों और अन्य हितधारकों को रिपोर्टिंग संबंधी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना भी इस पहल का हिस्सा है।
अधिकारियों के नेतृत्व में चल रहा अभियान
यह अभियान निदेशक एस.एच. उस्मानी और संयुक्त निदेशक सोनल सिंह के नेतृत्व में चलाया जा रहा है। इसमें उप निदेशक संदीप सिंह, आयकर अधिकारी राकेश कुमार वर्मा तथा आयकर अधिकारी (मुख्यालय) अभिषेक वर्मा का भी सहयोग रहा।
लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से वित्तीय लेन-देन की सही रिपोर्टिंग, रिकॉर्ड में सुधार और कर नियमों के अनुपालन के महत्व को रेखांकित किया गया। विभाग की पहल का मुख्य उद्देश्य वित्तीय सूचनाओं की पारदर्शिता बढ़ाना और कर प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने में सहयोग करना है।
स्थान: आयकर भवन, अशोक मार्ग, लखनऊ।
