निर्भया के दोषियों को फांसी देने वाले पवन जल्लाद का बड़ा बयान, बोले- मौका मिला तो मुस्कान-साहिल और रविता-अमरदीप को भी दूंगा फांसी
मेरठ: नीला ड्रम कांड में सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद निर्भया कांड के दोषियों को फांसी देने वाले मेरठ के पवन जल्लाद का बयान सामने आया है। पवन जल्लाद ने कहा है कि अगर जेल प्रशासन की ओर से उन्हें जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो वह मुस्कान और साहिल के साथ सांप कांड में मृत्युदंड पाने वाले रविता और अमरदीप को भी फांसी देने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि जघन्य अपराधों में दोषियों को जल्द और कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि कानून का डर बना रहे।
जेल प्रशासन बुलाएगा तो निभाऊंगा जिम्मेदारी
पवन जल्लाद ने हिन्दुस्तान संवाददाता से फोन पर बातचीत में कहा कि यदि जेल प्रशासन उन्हें बुलाकर फांसी देने की जिम्मेदारी सौंपता है, तो वह इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने गंभीर अपराधों में सख्त सजा दिए जाने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही कहा कि दोषियों को सजा न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही मिलनी चाहिए।
फांसी के लिए बिहार से आती है 24 फीट लंबी सफेद रस्सी
पवन जल्लाद ने फांसी की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि इसके लिए इस्तेमाल होने वाली सफेद रस्सी बिहार से मंगाई जाती है। इसकी लंबाई करीब 24 फीट होती है।
उन्होंने बताया कि फांसी दिए जाने से लगभग तीन दिन पहले जेल प्रशासन उन्हें सूचना देता है। इसके बाद वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत एक दिन पहले जेल पहुंचते हैं और फांसी से पहले परीक्षण करते हैं, ताकि अंतिम समय में किसी तकनीकी समस्या का सामना न करना पड़े।
चार पीढ़ियों से परिवार में चला आ रहा है जल्लाद का काम
पवन जल्लाद के मुताबिक, उनके परिवार में कई पीढ़ियों से फांसी देने का काम होता रहा है। उनके परदादा लक्ष्मण, दादा कालू राम और पिता मम्मू भी जल्लाद थे। अब वह इस पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वह अपने बेटे को भी इस काम की ट्रेनिंग देंगे, जिससे आने वाली पीढ़ी में भी यह पेशा जारी रह सके।
निर्भया कांड के दोषियों को फांसी देने के बाद चर्चा में आए थे पवन
दिल्ली में दिसंबर 2012 में हुए निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस मामले में दोषियों को सजा दिलाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। आखिरकार चार दोषियों मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह को 20 मार्च 2020 को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी। इस कार्रवाई के बाद पवन जल्लाद देशभर में चर्चा में आए थे।
महीने में एक बार जेल जाकर फांसीघर का निरीक्षण करते हैं
जेल अधिकारियों के अनुसार, पवन जल्लाद महीने में एक बार जेल पहुंचते हैं। इस दौरान वह फांसीघर का निरीक्षण करते हैं और जांच के बाद वापस लौट जाते हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें अलग से बुलाया जाता है।
मानदेय 10 हजार से बढ़ाकर 30 हजार करने की मांग
पवन जल्लाद ने बताया कि फिलहाल उन्हें 10 हजार रुपये मानदेय मिलता है। उन्होंने सरकार को चार बार पत्र लिखकर इसे बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस संबंध में वह पहले भी अपनी मांग सरकार के सामने रख चुके हैं।
