यूपी चुनाव से पहले भाजपा का बड़ा सियासी दांव, पूर्वांचल में शाह-नितिन नवीन संभालेंगे मोर्चा
वाराणसी और आजमगढ़ में होने वाले कार्यक्रमों के जरिए भाजपा पूर्वांचल में राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है। वहीं, लखनऊ में प्रस्तावित बैठकों के दौरान संगठन, सरकार और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय, चुनावी मुद्दों और आगामी रणनीति पर चर्चा होगी। पार्टी नवंबर से संगठन को पूरी सक्रियता के साथ मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े लगातार उत्तर प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के बीच विभिन्न क्षेत्रों में समन्वय बैठकें भी हो रही हैं।
वाराणसी से आजमगढ़ तक पूर्वांचल पर फोकस
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक कपड़ा मिल की आधारशिला रखी। उन्होंने गंगा किनारे आयोजित एयर शो भी देखा। इस दौरान उनका कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच पहुंचना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। पार्टी की नजर पूर्वांचल में संगठन की स्थिति और चुनावी माहौल को समझने पर है।
27 अक्टूबर को आजमगढ़ में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के मंच पर नितिन नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पहुंचने का कार्यक्रम है। इस आयोजन के जरिए भाजपा और उसके सहयोगी दल समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्र में अपनी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश करेंगे।
आजमगढ़ का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है, क्योंकि 2017 के विधानसभा चुनाव में जिले की 10 सीटों में भाजपा को केवल एक सीट मिली थी। 2022 के चुनाव में पार्टी यहां कोई सीट नहीं जीत सकी थी। ऐसे में आजमगढ़ में शीर्ष नेताओं की मौजूदगी को पूर्वांचल में राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
गठबंधन सहयोगियों को साधने की चुनौती
आजमगढ़ में सुभासपा के मंच पर भाजपा नेताओं की मौजूदगी को एनडीए की एकजुटता के संदेश से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में निषाद पार्टी की ओर से गठबंधन को लेकर असंतोष जताए जाने की चर्चा के बीच सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखना भाजपा के लिए अहम है।
सुभासपा के अलावा राष्ट्रीय लोकदल (रालोद), अपना दल (एस) और निषाद पार्टी के साथ चुनावी संबंधों को सहज बनाए रखना भी पार्टी की रणनीति का हिस्सा है। गठबंधन में तालमेल और सीटों को लेकर संभावित मतभेदों को समय रहते सुलझाना आगामी चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।
लखनऊ में अमित शाह करेंगे रणनीतिक मंथन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 30 और 31 अक्टूबर को लखनऊ में प्रदेश और राष्ट्रीय पदाधिकारियों, केंद्र व राज्य सरकार के मंत्रियों, क्षेत्रीय और जिला इकाइयों के प्रतिनिधियों तथा पार्टी के छह मोर्चों के साथ बैठकें करेंगे। इन बैठकों में संगठन की तैयारियों, चुनावी मुद्दों और जमीनी स्तर पर पार्टी की सक्रियता की समीक्षा होने की संभावना है।
भाजपा की कोशिश बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने और चुनावी प्रबंधन को मजबूत करने की है। पार्टी पहले भी चुनावों में सूक्ष्म प्रबंधन और कार्यकर्ताओं के व्यापक नेटवर्क पर जोर देती रही है। लखनऊ की बैठकों में इसी तरह की रणनीति को नए सिरे से तैयार करने पर ध्यान दिया जा सकता है।
इन मुद्दों से बढ़ी भाजपा की चिंता
उत्तर प्रदेश में भाजपा के सामने संगठनात्मक चुनौतियों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी और सरकार व कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय का सवाल भी है। यूजीसी से जुड़े आरक्षण के मुद्दे और नीट परीक्षा में पेपर लीक जैसे मामलों पर युवाओं के असंतोष ने भी राजनीतिक चर्चा को प्रभावित किया है।
2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले के प्रभाव के बाद भाजपा के सामने ओबीसी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने की चुनौती है। इसके अलावा विधायकों के विरोधी सुर और टिकटों में संभावित बदलाव को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पार्टी नेतृत्व को संगठन में संतुलन बनाए रखना होगा।
अमित शाह की बैठकों और नितिन नवीन के क्षेत्रीय कार्यक्रमों से भाजपा की चुनावी तैयारियों को दिशा देने की कोशिश होगी। हालांकि, इन रणनीतियों का चुनावी परिणाम पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में मतदाताओं की प्रतिक्रिया और पार्टी के जमीनी प्रदर्शन से स्पष्ट होगा।
