होर्मुज में अमेरिका का बड़ा सैन्य एक्शन, ईरान के क़ेश्म द्वीप पर कई धमाके; तेहरान ने 2 अमेरिकी ड्रोन गिराने का किया दावा

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वॉशिंगटन/तेहरान: होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका ने ईरान के क़ेश्म द्वीप पर स्थित कुछ ठिकानों को निशाना बनाकर सीमित रक्षात्मक हमले किए हैं। अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, ईरानी बल अमेरिकी सैन्य संपत्तियों के खिलाफ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहे थे। इसी के जवाब में संबंधित ठिकानों पर कार्रवाई की गई।

अमेरिकी अधिकारियों ने इस सैन्य कार्रवाई को सीमित बताते हुए स्पष्ट किया कि इसे बड़े पैमाने पर युद्ध दोबारा शुरू होने के संकेत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह घटनाक्रम अमेरिका के महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनाव से कुछ घंटे पहले सामने आया है। इस बीच ईरान के सरकारी मीडिया ने क़ेश्म द्वीप पर लगातार कई धमाकों की आवाजें सुनाई देने की खबर दी है।

ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, द्वीप पर पांच धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इसके अलावा पास के बंदर लेंगेह में भी विस्फोट होने की जानकारी सामने आई है।

ईरान का दावा- होर्मुज के पास दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए

अमेरिकी हमलों के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दो अमेरिकी MQM-170 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। ईरानी पक्ष के अनुसार, इन ड्रोन को निशाना बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली का इस्तेमाल किया गया।

इसके अलावा ईरानी मीडिया ने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को भी गिराने का दावा किया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और अमेरिकी पक्ष की ओर से भी तत्काल इसकी पुष्टि नहीं की गई।

क़ेश्म द्वीप क्यों है अमेरिका और ईरान के लिए अहम?

ईरान का क़ेश्म द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश क्षेत्र के पास स्थित है। अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण यह द्वीप सैन्य और समुद्री रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, यहां ईरान की सैन्य सुविधाएं, नौसैनिक प्रतिष्ठान और मिसाइल से जुड़ा बुनियादी ढांचा मौजूद है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य हलचल का असर अमेरिका और ईरान के संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

ट्रंप के बातचीत वाले संकेतों के बीच सैन्य कार्रवाई

क़ेश्म द्वीप पर अमेरिकी हमले की खबर ऐसे समय आई है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के साथ बातचीत और समझौते की संभावनाओं के संकेत दिए जा रहे थे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस भी ईरान के साथ बातचीत के जरिए किसी समझौते तक पहुंचने की उम्मीद जता चुके थे।

ट्रंप इससे पहले मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर नए हमले नहीं करने की बात कह चुके थे। हालांकि, उनके अलग-अलग बयानों में सैन्य कार्रवाई की संभावना को लेकर भी संकेत मिलते रहे। सोमवार को जब उनसे चुनाव के बाद ईरान पर हमला करने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने ‘नहीं’ में जवाब दिया था।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के बीच ईरान बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा

अमेरिका में ईरान के साथ जारी तनाव और युद्ध की आशंका का असर घरेलू राजनीति पर भी पड़ रहा है। ईंधन की कीमतों और अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रभाव को रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस में अपना नियंत्रण बरकरार रखने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में क़ेश्म द्वीप पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और ईरान की ओर से अमेरिकी ड्रोन गिराने के दावों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है।

हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने ताजा कार्रवाई को सीमित रक्षात्मक अभियान बताया है। फिलहाल इसे व्यापक सैन्य अभियान की शुरुआत के तौर पर पेश नहीं किया गया है।

 

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