पेंशन के साथ हेल्थ कवर का डबल फायदा! NPS में जल्द आएगा ‘2-इन-1’ प्लान, बुढ़ापे में इलाज की चिंता होगी कम
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के तहत रिटायरमेंट की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब सिर्फ पेंशन ही नहीं, बल्कि इलाज के खर्च की चिंता से भी छुटकारा मिल सकता है। पेंशन फंड रेगुलेटर पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) की ओर से ऐसा मॉडल तैयार किया जा रहा है, जिसमें पेंशन सेविंग और हेल्थ कवर को एक साथ जोड़ा जाएगा। रेगुलेटर के मुताबिक, तीन पेंशन फंड मैनेजर्स बीमा कंपनियों और हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ मिलकर इस तरह की स्कीम पर काम कर रहे हैं।
‘हेल्थ’ इनिशिएटिव के तहत तैयार हो रहा नया मॉडल
यह पहल पीएफआरडीए द्वारा इस साल की शुरुआत में शुरू किए गए ‘हेल्थ’ इनिशिएटिव का हिस्सा है। इसका मकसद निवेशकों को यह सुविधा देना है कि वे अपनी रिटायरमेंट सेविंग का एक हिस्सा खास तौर पर मेडिकल जरूरतों के लिए अलग रख सकें। प्रस्तावित ढांचे के मुताबिक, एनपीएस निवेश का 30 फीसदी तक हिस्सा रिटायरमेंट के बाद हेल्थ केयर खर्चों के लिए रिजर्व किया जा सकेगा। इससे एक तरह का डेडिकेटेड ‘मेडिकल पेंशन’ फंड बनेगा, जो बढ़ती स्वास्थ्य लागत से निपटने में मदद करेगा।
जल्द लॉन्च हो सकता है पहला प्रोडक्ट
एनपीएस से जुड़े निवेशकों की संख्या बड़ी होने के चलते पेंशन फंड मैनेजर्स के पास बेहतर मोलभाव की ताकत होगी। इसका फायदा यह होगा कि हेल्थ इंश्योरेंस टॉप-अप सस्ते मिल सकेंगे, अस्पतालों में क्लेम सेटलमेंट तेज हो सकता है और इलाज की कुल लागत भी कम रहने की संभावना है। पीएफआरडीए के अनुसार, ICICI, Axis और Tata समूह से जुड़े पेंशन फंड इस मॉडल पर प्रयोग कर रहे हैं और जल्द ही बाजार में प्रोडक्ट उतारे जाने की उम्मीद है।
केवल मेडिकल खर्च के लिए होगा इस्तेमाल
पीएफआरडीए के चेयरमैन एस. रामन ने स्पष्ट किया है कि इस मेडिकल पेंशन योजना का उद्देश्य लोगों को बुढ़ापे की सेहत से जुड़ी जरूरतों के लिए पहले से तैयार करना है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को अपनी सुरक्षा खुद सुनिश्चित करनी होगी और इस स्कीम के तहत जो रकम अलग रखी जाएगी, उसका इस्तेमाल सिर्फ चिकित्सा खर्चों के भुगतान के लिए ही किया जाएगा। जनवरी में लॉन्च किए गए हेल्थ प्लेटफॉर्म के जरिए इसी दिशा में काम शुरू हो चुका है।
हेल्थ इंश्योरेंस टॉप-अप और अस्पतालों को फायदा
इस प्रस्तावित प्रोडक्ट में हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से सस्ते टॉप-अप कवर भी शामिल किए जा सकते हैं, जो 30 फीसदी रिजर्व राशि के अतिरिक्त होंगे। बड़ी संख्या में मरीज मिलने से अस्पताल भी इलाज के लिए बेहतर ऑफर दे सकेंगे। इसके साथ ही, अस्पतालों को इलाज के तुरंत बाद भुगतान मिलने की व्यवस्था हो सकती है, जो मौजूदा कई सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से अलग और तेज होगी।
ये बैंक और ग्रुप कर रहे हैं तैयारी
रामन ने बताया कि आईसीआईसीआई, एक्सिस और टाटा समर्थित पेंशन फंड इस समय इस कवरेज को लॉन्च करने की दिशा में प्रयोग कर रहे हैं और उम्मीद है कि आईसीआईसीआई सबसे पहले अंतिम प्रोडक्ट लेकर आएगा। इसके अलावा, पीएफआरडीए ने संकेत दिया है कि दोहरे अंकों के रिटर्न को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए प्रोजेक्ट फाइनेंस और रियल एस्टेट जैसी असेट क्लास में निवेश की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। मार्च के अंत से पहले किसी वैकल्पिक निवेश फंड में पहला निवेश होने की उम्मीद है।
नए खिलाड़ियों की एंट्री और कवरेज बढ़ाने की कोशिश
पीएफआरडीए ने सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में सीमित निवेश की भी अनुमति दी है। इसके बाद कम से कम चार बैंक या बैंक समूहों ने पेंशन फंड बिजनेस में उतरने में रुचि दिखाई है। इनमें Axis Bank, Union Bank of India, Indian Bank और Star Dai-ichi का समूह शामिल है। पीएफआरडीए ने यह भी माना कि एनपीएस का कवरेज अभी सीमित है और करीब एक करोड़ लोगों तक ही पहुंच पाया है। इसे बढ़ाने के लिए रेगुलेटर नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ बातचीत कर रहा है।
