अब मच्छर बनेंगे ‘फ्लाइंग सिरिंज’! चमगादड़ों को वैक्सीन देने के लिए वैज्ञानिकों का अनोखा प्रयोग
दुनिया भर में निपाह और रेबीज जैसे खतरनाक वायरस के प्रसार में चमगादड़ों को बड़ा स्रोत माना जाता है। समस्या यह है कि जंगली चमगादड़ों को पकड़कर उन्हें वैक्सीन देना लगभग असंभव होता है। इसी चुनौती का समाधान खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने एक अनोखी तकनीक पर काम शुरू किया है, जिसमें मच्छरों के जरिए वैक्सीनेशन कराने की योजना बनाई गई है।
कैसे काम करेगी ‘मच्छर वैक्सीन’ तकनीक
इस अनोखे प्रयोग में वैज्ञानिकों ने एडीज एजिप्टी प्रजाति के मच्छरों का इस्तेमाल किया। सबसे पहले इन मच्छरों को ऐसा खून पिलाया गया जिसमें निपाह और रेबीज के खिलाफ तैयार वैक्सीन मौजूद थी। यह वैक्सीन मच्छरों के शरीर में पहुंचकर उनकी लार ग्रंथियों तक पहुंच गई।
इसके बाद जब ये मच्छर चमगादड़ों को काटते हैं या फिर चमगादड़ अनजाने में इन मच्छरों को खा लेते हैं, तो वैक्सीन उनके शरीर में प्रवेश कर जाती है। इस तरह मच्छर एक तरह से उड़ने वाली सिरिंज की तरह काम करते हैं और वैक्सीन सीधे जानवरों के शरीर तक पहुंच जाती है।
लैब परीक्षण में मिले चौंकाने वाले नतीजे
इस तकनीक को परखने के लिए वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में चूहों और चमगादड़ों पर परीक्षण किया। वैक्सीन वाले मच्छरों को इन जानवरों के बीच छोड़ा गया। जांच के बाद पाया गया कि जिन जानवरों को इन मच्छरों ने काटा था, उनके शरीर में वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हो गईं।
इस नतीजे ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया। इससे संकेत मिलता है कि मच्छर केवल बीमारियां फैलाने वाले जीव नहीं हैं, बल्कि भविष्य में इलाज पहुंचाने का भी एक नया माध्यम बन सकते हैं।
नई तकनीक पर विशेषज्ञों की चिंताएं भी
हालांकि यह प्रयोग सफल माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों ने इसके सामने कई बड़ी चुनौतियों की ओर भी इशारा किया है।
सबसे बड़ी चिंता अनियंत्रित वैक्सीनेशन को लेकर है। मच्छरों को नियंत्रित करना लगभग असंभव होता है। ऐसे में यह तय करना मुश्किल होगा कि वे केवल चमगादड़ों को ही काटेंगे या किसी अन्य जीव या इंसान को भी।
कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके बजाय “ड्रिंक स्टेशन” जैसे विकल्प पर भी विचार किया जाना चाहिए। इसमें ऐसे स्थान बनाए जा सकते हैं जहां वैक्सीन मिला मीठा घोल रखा जाए, जिसे चमगादड़ खुद आकर पी सकें।
इसके अलावा यह सवाल भी बना हुआ है कि अगर किसी चमगादड़ के शरीर में पहले से वायरस की मात्रा बहुत अधिक हो, तो क्या यह वैक्सीन उसे फैलने से रोक पाएगी या नहीं। इन सवालों के जवाब पाने के लिए वैज्ञानिकों को अभी और शोध करने की जरूरत होगी।
