मेहनत की रोशनी: स्थानीय बाजार से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक विस्तार, नेपाल तक चमक रहे हैं मीना देवी के बनाए LED बल्ब

unnamed

बिहार के सीतामढ़ी की उद्यमी मीना देवी आज उन महिलाओं के लिए मिसाल बन चुकी हैं, जो आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती हैं। पिछले 10 से 12 वर्षों से बल्ब निर्माण के व्यवसाय से जुड़ी मीना देवी ने शून्य से शुरुआत कर आज अपनी अलग पहचान बनाई है। पति संतोष कुमार के साथ मिलकर उन्होंने साधारण LED बल्ब से लेकर रंगीन और आधुनिक डिजाइन के विभिन्न प्रकार के बल्ब तैयार करने में महारत हासिल की है।

यह सफर सिर्फ एक कारोबार नहीं, बल्कि उनके हौसले और संघर्ष की कहानी है, जिसने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और उन्हें समाज में नई पहचान दिलाई।

स्थानीय बाजार से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक पहुंच

मीना देवी के बनाए बल्बों की मांग अब सिर्फ गांव या जिले तक सीमित नहीं है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल में भी उनके उत्पादों की सप्लाई होने लगी है।

रिपोर्टर से बातचीत में उन्होंने बताया कि छोटे से घरेलू सेटअप से शुरू हुआ यह काम अब बड़े स्तर पर पहुंच चुका है। गुणवत्ता और भरोसे की वजह से सीमा पार भी उनके ब्रांड की मांग बढ़ रही है। यह किसी भी ग्रामीण महिला उद्यमी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

‘जीविका’ से मिला सहारा, 35 हजार ने बदली तस्वीर

मीना देवी की सफलता में जीविका समूह की अहम भूमिका रही है। साल 2014 में इस समूह से जुड़ने के बाद उन्हें निरंतर मार्गदर्शन मिला। वर्ष 2023 में उन्हें 35,000 रुपये का आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ, जिसने उनके व्यवसाय को नई गति दी।

उन्होंने बताया कि इस राशि को पूरी तरह उत्पादन बढ़ाने और कच्चे माल की खरीद में लगाया गया, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता में इजाफा हुआ। यह सहयोग उनके लिए ‘बूस्टर डोज’ साबित हुआ।

ग्रामीण महिलाएं बन सकती हैं अर्थव्यवस्था की रीढ़

मीना देवी मानती हैं कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग जीवन बदल सकता है। उनका उदाहरण बताता है कि अगर सही दिशा और संसाधन मिलें, तो ग्रामीण महिलाएं भी बड़े उद्योग खड़े कर सकती हैं और रोजगार के अवसर पैदा कर सकती हैं।

अब सपना बड़े कारखाने का

अपनी उपलब्धियों से उत्साहित मीना देवी अब अपने छोटे व्यवसाय को बड़े उद्योग में बदलने का सपना देख रही हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार से और अधिक आर्थिक सहायता तथा आधुनिक मशीनरी मिले, तो वे उत्पादन बढ़ाकर कई लोगों को रोजगार दे सकती हैं।

मीना देवी की कहानी यह साबित करती है कि हौसला और मेहनत हो तो छोटे गांव से उठकर भी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा जा सकता है।

 

एक नज़र