कम उम्र में बढ़ रहा फैटी लिवर का खतरा, क्या आपकी रोज़ की थाली ही बन रही है बीमारी की वजह?
एक दशक पहले तक फैटी लिवर की समस्या आमतौर पर 40 से 50 साल की उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब यह बीमारी 20 से 30 साल के युवाओं से लेकर बच्चों तक में तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों की मानें तो इसकी सबसे बड़ी वजह बदलती लाइफस्टाइल और गलत खानपान है। हैरानी की बात यह है कि अब शराब न पीने वाले लोग भी फैटी लिवर की चपेट में आ रहे हैं, जिसकी जड़ सीधा हमारी रोजमर्रा की खाने की आदतों से जुड़ी है।
खाने की थाली बन रही बीमारी की वजह
दिल्ली एमसीडी में तैनात डॉ. अजय कुमार के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग रोजाना बाहर का खाना खाते हैं। बाहर मिलने वाली रोटियों में अक्सर मैदे का इस्तेमाल ज्यादा होता है, जो सीधे तौर पर फैटी लिवर का कारण बनता है। इसके अलावा कोल्ड ड्रिंक, मीठी चीजें और तला-भुना भोजन लिवर पर अतिरिक्त चर्बी जमा करने का काम करता है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
बिना शराब के भी हो सकता है फैटी लिवर
डॉक्टर बताते हैं कि जो लोग शराब नहीं पीते और फिर भी फैटी लिवर से पीड़ित हो जाते हैं, उसे नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज कहा जाता है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। फैटी लिवर के भी कई स्टेज होते हैं, जैसे ग्रेड-1, ग्रेड-2, लिवर फाइब्रोसिस और लिवर सिरोसिस। इनमें लिवर सिरोसिस सबसे गंभीर स्थिति है, जिसमें कई मामलों में लिवर ट्रांसप्लांट तक की जरूरत पड़ सकती है।
फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण क्या हैं
शुरुआत में फैटी लिवर के लक्षण अक्सर नजर नहीं आते, लेकिन समय के साथ संकेत दिखने लगते हैं। इनमें लगातार थकान रहना, पेट के दाहिने हिस्से में हल्का दर्द, वजन तेजी से बढ़ना जैसी समस्याएं शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, क्योंकि शुरुआती स्टेज में इस बीमारी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। लापरवाही करने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
फैटी लिवर से बचाव कैसे करें
डाइट में हरी सब्जियां और फल शामिल करें
रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करें
वजन को नियंत्रण में रखें
शुगर और ट्राइग्लिसराइड लेवल की नियमित जांच कराएं
