मिडिल ईस्ट में युद्ध से तेल बाजार में उथल-पुथल, कच्चा तेल महंगा; अमेरिकी कंपनियों को 60 अरब डॉलर तक अप्रत्याशित मुनाफे की संभावना
दुनिया इस समय एक गंभीर ऊर्जा संकट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। 28 फरवरी से ईरान के आसपास शुरू हुए युद्ध ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जिसे वैश्विक तेल व्यापार की सबसे अहम लाइफलाइन माना जाता है, वहां बढ़ते विवाद के कारण सप्लाई में बड़ी रुकावट पैदा हो गई है। यही समुद्री मार्ग दुनिया के कई देशों के लिए कच्चे तेल की मुख्य आपूर्ति का जरिया है। इस बाधा का सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ रहा है। ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है, जिससे आम लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ता जा रहा है।
ऊर्जा संकट के बीच अमेरिकी तेल कंपनियों के लिए बड़ा मौका
वैश्विक संकट का असर अलग-अलग देशों पर अलग तरीके से दिख रहा है। जहां अधिकतर देश और आम उपभोक्ता बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, वहीं अमेरिका की तेल उत्पादक कंपनियों के लिए मौजूदा हालात एक बड़ा आर्थिक अवसर बनकर सामने आए हैं। ईरान से जुड़े युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को झटका दिया है, लेकिन अमेरिकी कंपनियां इस परिस्थिति का लाभ उठाने में सफल होती दिखाई दे रही हैं। तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण उनका राजस्व तेजी से बढ़ रहा है और कई कंपनियां इस संकट को वित्तीय लाभ में बदल रही हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 47 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ने 100 डॉलर प्रति बैरल का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया। वहीं अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 98.71 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। एक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, निवेश बैंक जेफरीज का अनुमान है कि केवल मार्च महीने में ही अमेरिकी तेल उत्पादकों को बढ़ी कीमतों के कारण करीब 5 अरब डॉलर का अतिरिक्त कैश फ्लो मिल सकता है।
पूरे साल में 60 अरब डॉलर से ज्यादा अतिरिक्त कमाई की संभावना
ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर साल 2026 के दौरान कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो अमेरिकी तेल कंपनियों को इस वर्ष करीब 60 अरब डॉलर से अधिक का अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। एक ऊर्जा रिसर्च फर्म के आकलन के मुताबिक यदि पूरे साल कच्चे तेल का औसत मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है तो अमेरिकी उत्पादकों के पास लगभग 63.4 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त नकदी जमा हो सकती है।
