बजट में बड़ा कूटनीतिक संदेश: बांग्लादेश-मालदीव की मदद घटी, नेपाल-भूटान समेत मित्र देशों पर भारत मेहरबान

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केंद्र सरकार के ताजा बजट ने पड़ोसी और मित्र देशों के साथ भारत की प्राथमिकताओं को साफ संकेतों में सामने रखा है। बांग्लादेश और मालदीव को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में कटौती की गई है, जबकि नेपाल, भूटान और श्रीलंका जैसे देशों के लिए भारत ने अपनी वित्तीय मदद का दायरा बढ़ाया है। इसके साथ ही ईरान के चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग पूरी तरह रोक दिया जाना भी इस बजट का सबसे अहम और चौंकाने वाला फैसला माना जा रहा है।

बांग्लादेश की सहायता आधी, रिश्तों की तल्खी से जोड़कर देखा जा रहा फैसला

केंद्रीय बजट 2026-27 में बांग्लादेश को दी जाने वाली आर्थिक सहायता को 120 करोड़ रुपये से घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यानी भारत ने अपने पड़ोसी देश के लिए आवंटन आधा कर दिया है। इस कटौती को अगस्त 2024 के बाद बदले राजनीतिक हालात से जोड़कर देखा जा रहा है, जब शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी थी। इसके बाद से भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई ठंडक का असर अब बजट आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है।

मित्र देशों के लिए कुल सहायता बढ़ी, लेकिन संशोधित अनुमान से कम

बजट दस्तावेजों के मुताबिक, भारत ने अपने मित्र देशों को दी जाने वाली कुल आर्थिक सहायता बढ़ाकर 5,686 करोड़ रुपये कर दी है, जो पिछले बजट अनुमान 5,483 करोड़ रुपये से करीब 4 फीसदी अधिक है। हालांकि, यह राशि 2025-26 के संशोधित अनुमान 5,785 करोड़ रुपये से कम बनी हुई है, जिससे यह साफ होता है कि सरकार ने संतुलित और चयनात्मक दृष्टिकोण अपनाया है।

चाबहार परियोजना को झटका, फंडिंग पूरी तरह बंद

इस बजट का सबसे बड़ा सरप्राइज ईरान के चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट को लेकर सामने आया है। 2026-27 के बजट में इस रणनीतिक परियोजना के लिए एक भी रुपये का आवंटन नहीं किया गया है। जबकि 2024-25 में भारत ने चाबहार पर 400 करोड़ रुपये खर्च किए थे और 2025-26 में भी संशोधित अनुमान के तहत 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। यह फैसला ऐसे वक्त में आया है, जब भारत ने 2024 में चाबहार के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन के लिए ईरान के साथ 10 साल का समझौता किया था। यह परियोजना पाकिस्तान को बाइपास कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक भारत की रणनीतिक पहुंच के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है।

अमेरिका के टैरिफ ऐलान की भी दिखी छाया

विशेषज्ञ इस फैसले को वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम से भी जोड़कर देख रहे हैं। साल की शुरुआत में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। ऐसे में चाबहार को लेकर भारत की सतर्कता बजट में साफ नजर आ रही है।

भूटान को सबसे ज्यादा फायदा, नेपाल की मदद में 14% उछाल

बांग्लादेश के उलट भारत के भरोसेमंद मित्र देशों के लिए बजट में राहत भरी खबर है। भूटान एक बार फिर भारत से सबसे ज्यादा आर्थिक सहायता पाने वाला देश बना हुआ है। उसके लिए आवंटन करीब 6 फीसदी बढ़ाकर 2,289 करोड़ रुपये किया गया है। नेपाल को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में लगभग 14 फीसदी की बढ़ोतरी करते हुए इसे 800 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं श्रीलंका को 400 करोड़ रुपये मिलेंगे, जो पहले के मुकाबले लगभग एक-तिहाई ज्यादा है।

मालदीव और म्यांमार की मदद घटी, मॉरीशस को बढ़त

केंद्रीय बजट में मालदीव के लिए भारत की आर्थिक सहायता में 8 फीसदी की कटौती करते हुए इसे 550 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके उलट मॉरीशस को 10 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद 550 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। अफगानिस्तान के लिए सहायता 150 करोड़ रुपये पर स्थिर रखी गई है, जो मुख्य रूप से मानवीय जरूरतों से जुड़ी है। वहीं म्यांमार के लिए आवंटन में करीब 14 फीसदी की कटौती कर इसे 300 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

 

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