Amazon से Oracle तक छंटनी का दौर! क्या वाकई AI बना नौकरियों का दुश्मन या इसके पीछे है बड़ी कॉरपोरेट रणनीति?

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नए साल 2026 की शुरुआत टेक इंडस्ट्री के लिए राहत नहीं, बल्कि चिंता की वजह बनती दिख रही है। दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों में एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनियों का सिलसिला तेज हो गया है। Amazon, Oracle, Pinterest, Expedia और Dow जैसी कंपनियों के फैसलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ही नौकरियों की कटौती की सबसे बड़ी वजह है, या फिर इसके पीछे कोई और गहरी सच्चाई छिपी है।

Amazon में 30 हजार से ज्यादा नौकरियां गईं, चिंता बढ़ी
ई-कॉमर्स और क्लाउड दिग्गज Amazon ने हाल ही में वैश्विक स्तर पर 16,000 कॉर्पोरेट कर्मचारियों की छंटनी का ऐलान किया है। इससे पहले अक्टूबर 2025 में कंपनी 14,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा चुकी है। यानी कुल मिलाकर 30,000 से ज्यादा नौकरियां जा चुकी हैं। कंपनी के CEO एंडी जैसी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि AI से कामकाज ज्यादा कुशल होगा और भविष्य में कम कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी। हालांकि Amazon ने इसे सिर्फ AI नहीं, बल्कि “ब्यूरोक्रेसी कम करने” और “स्टार्टअप जैसी फुर्ती” लाने की रणनीति से भी जोड़ा है। इसके अलावा Amazon Go और Fresh स्टोर्स बंद होने से हजारों रिटेल जॉब्स भी खत्म हुई हैं।

Oracle, Pinterest और Expedia में भी भारी कटौती
Oracle में 20,000 से 30,000 तक नौकरियों में कटौती की संभावना जताई जा रही है। Pinterest ने साफ तौर पर कहा कि उसने अपनी वर्कफोर्स का करीब 15% घटाया है ताकि संसाधनों को AI-केंद्रित टीमों और प्रोजेक्ट्स में लगाया जा सके। वहीं Expedia ने भी AI को अपनाने की बात कही, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि छंटनी में मशीन लर्निंग साइंटिस्ट जैसे AI विशेषज्ञ भी शामिल थे। Dow ने अपनी 4,500 छंटनियों को सीधे तौर पर “AI और ऑटोमेशन” से जोड़ा, ताकि उत्पादकता बढ़ाई जा सके और शेयरधारकों को बेहतर रिटर्न मिल सके।

AI वजह या सिर्फ एक ‘कहानी’? पूर्व कर्मचारियों ने उठाए सवाल
छंटनियों को लेकर अब खुद पूर्व कर्मचारी सवाल खड़े कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स में AP के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, Amazon की “AI Enablement” टीम के पूर्व प्रमुख एन ली प्लमब, जिन्हें हाल ही में कंपनी से निकाला गया, का कहना है कि उनकी छंटनी AI से जुड़ी नहीं थी। दिलचस्प बात यह है कि वे खुद Amazon के AI कोडिंग टूल्स के टॉप यूजर्स में शामिल थे। प्लमब के मुताबिक, कंपनियां पहले से मौजूद अतिरिक्त कर्मचारियों को हटाने के लिए AI को एक “वैल्यू क्रिएशन स्टोरी” की तरह पेश कर रही हैं, जिससे शेयर बाजार में भरोसा बढ़े और निवेशक आकर्षित हों।

एक्सपर्ट्स की राय: AI का असर अभी सीमित
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर करन गिरोत्रा का मानना है कि AI का असर फिलहाल व्यक्तिगत कर्मचारियों के स्तर तक सीमित है। AI से समय की बचत जरूर हो रही है, लेकिन पूरे संगठन को उसी हिसाब से ढालने में वक्त लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार, Amazon जैसी कंपनियों में कोविड काल के दौरान जरूरत से ज्यादा भर्ती हुई थी और अब उसी का संतुलन बैठाया जा रहा है।

गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट क्या कहती है?
गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा करती है कि AI का कुल श्रम बाजार पर प्रभाव अभी सीमित है। हालांकि मार्केटिंग, ग्राफिक डिजाइन, कस्टमर सर्विस और टेक जैसे क्षेत्रों में कुछ असर देखने को मिल सकता है, लेकिन दिसंबर से अब तक AI को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराकर की गई छंटनियों के मामले बेहद कम दर्ज हुए हैं।

निष्कर्ष: AI नहीं, रणनीति ज्यादा जिम्मेदार?
कुल मिलाकर तस्वीर यह बनती है कि AI को छंटनियों की मुख्य वजह बताना आसान जरूर है, लेकिन हकीकत में इसके पीछे कोविड के बाद की ओवरहायरिंग, लागत घटाने का दबाव, शेयरधारकों को खुश करने की रणनीति और बिजनेस मॉडल में बदलाव जैसे कई फैक्टर भी उतने ही अहम हैं।

 

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