15 साल की उम्र में करोड़ों की कमाई! वैभव सूर्यवंशी की नेटवर्थ चर्चा में, जानिए नाबालिगों की आय पर क्या कहता है कानून

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नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट में तेजी से उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी इन दिनों अपने शानदार प्रदर्शन के साथ-साथ करोड़ों की कमाई को लेकर भी सुर्खियों में हैं। महज 15 साल की उम्र में आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट, ब्रांड एंडोर्समेंट और अन्य व्यावसायिक समझौतों के जरिए उनकी अनुमानित नेटवर्थ करीब 7 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ऐसे में लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या 18 साल से कम उम्र के बच्चों को भी अपनी कमाई पर आयकर देना पड़ता है? भारतीय आयकर कानून इस मामले में क्या कहता है, इसे समझना जरूरी है।

उम्र नहीं, आय का स्रोत और रकम होती है अहम

भारतीय आयकर नियमों के अनुसार कर निर्धारण में उम्र से अधिक महत्व आय और उसके स्रोत का होता है। यदि किसी नाबालिग की आय निर्धारित कर योग्य सीमा से अधिक है, तो उस पर भी टैक्स देनदारी बन सकती है। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि कमाई किस माध्यम से हो रही है।

पैसिव इनकम पर लागू होता है क्लबिंग ऑफ इनकम का नियम

यदि किसी बच्चे के नाम पर बैंक जमा, ब्याज, म्यूचुअल फंड निवेश या किराये जैसी आय आती है, तो इसे पैसिव इनकम माना जाता है। आयकर अधिनियम की धारा 64(1A) के तहत ऐसी आय को बच्चे की व्यक्तिगत आय नहीं माना जाता, बल्कि माता-पिता की आय में जोड़ दिया जाता है।

इस व्यवस्था को ‘क्लबिंग ऑफ इनकम’ कहा जाता है। आमतौर पर जिस अभिभावक की आय अधिक होती है, बच्चे की ऐसी आय उसी की कुल आय में शामिल कर टैक्स की गणना की जाती है। हालांकि प्रति बच्चे 1,500 रुपये तक की सीमित कर छूट का प्रावधान भी है।

वैभव सूर्यवंशी के मामले में क्यों अलग हैं नियम?

वैभव सूर्यवंशी की कमाई सामान्य निवेश या पारिवारिक संपत्ति से नहीं, बल्कि उनके क्रिकेट कौशल और पेशेवर प्रदर्शन से हो रही है। आईपीएल फीस, मैच फीस, विज्ञापन अनुबंध और ब्रांड प्रमोशन से होने वाली आय को एक्टिव या प्रोफेशनल इनकम की श्रेणी में रखा जाता है।

आयकर कानून के मुताबिक यदि कोई नाबालिग अपनी विशेष प्रतिभा, खेल, कला, अभिनय, संगीत या किसी पेशेवर गतिविधि के जरिए कमाई करता है, तो उस आय को माता-पिता की आय में नहीं जोड़ा जाता। ऐसी स्थिति में नाबालिग को एक स्वतंत्र करदाता के रूप में माना जाता है।

क्या वैभव को भी देना होगा आयकर?

यदि वैभव सूर्यवंशी की कुल कर योग्य आय निर्धारित सीमा से अधिक है, तो उन्हें भी अन्य करदाताओं की तरह आयकर देना होगा। उनकी आय पर वही टैक्स स्लैब लागू होंगे जो वयस्क करदाताओं पर लागू होते हैं। केवल नाबालिग होने के आधार पर उन्हें किसी विशेष आयकर छूट का लाभ नहीं मिलता।

नाबालिग होने पर कैसे भरा जाता है आयकर रिटर्न?

चूंकि 18 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति अधिकांश कानूनी और वित्तीय अनुबंध स्वयं नहीं कर सकता, इसलिए उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक उसकी ओर से आयकर संबंधी प्रक्रियाएं पूरी करते हैं।

इसके लिए अभिभावक को आयकर विभाग के समक्ष प्रतिनिधि करदाता के रूप में पंजीकरण कराना होता है। नाबालिग के नाम पर पैन कार्ड और बैंक खाता संचालित किया जाता है, जिसके माध्यम से टैक्स भुगतान और आयकर रिटर्न दाखिल किया जाता है।

खेल और मनोरंजन जगत में बढ़ रहे हैं ऐसे उदाहरण

पिछले कुछ वर्षों में खेल, मनोरंजन और सोशल मीडिया के क्षेत्र में कई ऐसे युवा चेहरे सामने आए हैं, जिन्होंने कम उम्र में ही बड़ी कमाई की है। विशेषज्ञों का कहना है कि आयकर कानून में उम्र नहीं, बल्कि आय का स्रोत सबसे महत्वपूर्ण होता है।

यही कारण है कि यदि कोई नाबालिग अपनी प्रतिभा के दम पर लाखों या करोड़ों रुपये कमाता है, तो उसे भी स्वतंत्र करदाता माना जाता है और उसकी आय पर लागू नियमों के अनुसार कर देनदारी तय की जाती है।

 

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