UP बिजली बिल में 10% बढ़ोतरी पर विद्युत नियामक आयोग ने जताई सख्ती, यूपी पावर कॉरपोरेशन से 7 दिन में मांगा जवाब
लखनऊ। फरवरी माह के बिजली बिलों में ईंधन अधिभार शुल्क (फ्यूल सरचार्ज) में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रकरण को विद्युत नियामक आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने यूपी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से सात दिन के अंदर विस्तृत जवाब तलब किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अनुमोदित दर से महंगी बिजली की खरीद कैसे हुई, इसकी पूरी जानकारी दी जाए। इस आदेश के हवाले से राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार के आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी की है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जताई आपत्ति
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि पावर कॉरपोरेशन ने 28 जनवरी को जारी आदेश में लिखा था कि नवंबर माह का ईंधन अधिभार शुल्क फरवरी में 10 प्रतिशत की दर से वसूला जाएगा। इस बढ़ोतरी के विरोध में परिषद ने उसी दिन आयोग में लोक महत्व प्रस्ताव (Public Interest Petition) दाखिल कर आपत्ति दर्ज कराई थी। परिषद के अनुसार, ईंधन अधिभार के रूप में 616 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार 3.45 करोड़ से अधिक विद्युत उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
आयोग ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
आयोग ने पावर कारपोरेशन से पूछा है कि जनवरी में ईंधन अधिभार शुल्क में 2.33 प्रतिशत की कमी थी, फिर फरवरी में अचानक 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी कैसे लागू की गई। आयोग ने यह भी पूछा कि नवंबर के लिए 4.94 रुपये प्रति यूनिट की स्वीकृत दर के मुकाबले 5.79 रुपये प्रति यूनिट की महंगी बिजली क्यों खरीदी गई। आयोग ने स्पष्ट किया है कि कारपोरेशन को ईंधन अधिभार शुल्क से संबंधित आदेश तत्काल स्थगित करना चाहिए और राज्य सरकार को इस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए कदम उठाना चाहिए।
