‘मध्य पूर्व की जंग हमारी नहीं’, मनीष तिवारी ने सरकार की विदेश नीति का किया समर्थन

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत को इस संघर्ष में सीमित भूमिका ही निभानी चाहिए और सरकार का सतर्क रुख पूरी तरह उचित है। तिवारी के मुताबिक, मौजूदा हालात केवल एक युद्ध नहीं बल्कि कई जटिल संघर्षों का मिश्रण हैं, जिनका असर वैश्विक स्तर पर देखा जा रहा है।

‘यह हमारी लड़ाई नहीं है’—तिवारी का स्पष्ट संदेश

मनीष तिवारी ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति को केवल क्षेत्रीय नजरिए से नहीं देखा जा सकता। इसमें इजराइल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव शामिल है, जो बड़े वैश्विक समीकरणों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने दोहराया कि यह भारत की लड़ाई नहीं है और देश को इसमें सीधे तौर पर शामिल होने से बचना चाहिए।

रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने पर जोर

तिवारी ने भारत की विदेश नीति में ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से इस क्षेत्र में सीमित भूमिका निभाता आया है और उसे अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, यदि देश सोच-समझकर और सावधानीपूर्वक कदम उठाता है, तो वह सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

शशि थरूर ने भी किया सरकार के रुख का समर्थन

इस मुद्दे पर कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी सरकार के दृष्टिकोण की सराहना की है। उन्होंने अपने एक लेख में कहा कि मौजूदा संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उचित नहीं ठहराया जा सकता और यह संप्रभुता तथा गैर-आक्रामकता जैसे सिद्धांतों के खिलाफ है, जिनका भारत लंबे समय से समर्थन करता रहा है।

कूटनीति पर भारत का लगातार जोर

पूरे घटनाक्रम के दौरान भारत ने बातचीत और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी है। एक ओर जहां भारत ने खाड़ी क्षेत्र में ईरान के हमलों की आलोचना की, वहीं दूसरी ओर तेहरान के साथ संबंध बनाए रखते हुए ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास भी तेज किए हैं। विशेष रूप से होरमुज़ जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा संभालता है, भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है।

तनाव के बीच भारत का संतुलित रुख

गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और इजराइल से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत ने संतुलित और सावधानीपूर्ण नीति अपनाते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है। अब इस रुख को कांग्रेस के दो प्रमुख नेताओं का भी समर्थन मिल गया है।

 

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