हरियाली अमावस्या पर इन 4 चीजों का दान माना जाता है बेहद शुभ, शिव-पितरों के साथ शनि देव की कृपा पाने की मान्यता

Hariyali-Amavasya

नई दिल्ली। सावन मास में पड़ने वाली हरियाली अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है। यह दिन भगवान शिव की पूजा, पितरों के स्मरण और दान-पुण्य के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जरूरतमंदों को सामर्थ्य के अनुसार कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान शिव, शनि देव और पितरों की कृपा मिलने की भी मान्यता है। वर्ष 2026 में हरियाली अमावस्या 12 अगस्त को पड़ रही है।

हरियाली अमावस्या के दिन स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान शिव की पूजा और स्मरण किया जाता है। पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए तर्पण आदि धार्मिक कार्य भी किए जाते हैं। इसके बाद जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा है। मान्यता है कि बिना किसी दिखावे और सच्ची श्रद्धा से किया गया दान विशेष फलदायी होता है।

छतरी और जूते-चप्पल का दान

हरियाली अमावस्या पर छतरी का दान करना शुभ माना जाता है। सावन में बारिश के मौसम को देखते हुए जरूरतमंद व्यक्ति को छतरी देना सेवा का माध्यम भी बन सकता है। इसी तरह जूते या चप्पल का दान करने की भी धार्मिक परंपरा बताई गई है। मान्यता के अनुसार इससे पितरों की कृपा मिलने और जीवन की बाधाओं से राहत की कामना की जाती है।

दूध-दही और खाद्य सामग्री का दान

इस दिन दूध या दही का दान करने की भी परंपरा बताई गई है। दूध भगवान शिव की पूजा से जुड़ा हुआ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को दूध, दही, चावल, आटा या चीनी जैसी उपयोगी खाद्य सामग्री दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि ऐसे दान से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख-शांति एवं सकारात्मकता बनी रहती है।

काली उड़द का दान

हरियाली अमावस्या पर काली उड़द की दाल का दान भी विशेष माना जाता है। ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं में काले रंग की कुछ वस्तुओं का संबंध शनि देव से जोड़ा जाता है। इसी वजह से काली उड़द का दान शनि देव की कृपा से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा से किया गया यह दान जीवन में आने वाली बाधाओं और परेशानियों के बीच सकारात्मक भाव बनाए रखने में सहायक होता है।

काले तिल का दान भी माना जाता है शुभ

अमावस्या तिथि पर काले तिल का दान भी महत्वपूर्ण माना गया है। पितरों के नाम से काले तिल का दान करने और तर्पण में तिल का इस्तेमाल करने की धार्मिक परंपरा रही है। मान्यता है कि इससे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त होती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि दान में वस्तु की मात्रा से ज्यादा भावना और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद की सहायता को महत्व दिया जाता है।

हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व सेवा, दया और जरूरतमंदों की सहायता से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन भगवान शिव की पूजा और पितरों के स्मरण के साथ भोजन, वस्त्र और दैनिक उपयोग की वस्तुओं का दान भी किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और निस्वार्थ भाव से किया गया दान मन को संतोष और सकारात्मकता प्रदान करता है।

 

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