GST दरों में कटौती के बावजूद यूपी की कमाई बढ़ी, पिछले साल से 10,228 करोड़ ज्यादा राजस्व

UP-CM-yogi-in-singapore-1775529941404_v

लखनऊ में वित्तीय आंकड़ों ने एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है। वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कमी के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व में गिरावट नहीं आई, बल्कि पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार की कुल आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

राजस्व में 10,228 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी
आंकड़ों के मुताबिक, सरकार को पिछले वित्तीय वर्ष में 2,23,060.18 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो इससे पहले के वित्तीय वर्ष 2024-25 की 2,12,832.08 करोड़ रुपये की कमाई से 10,228.10 करोड़ रुपये अधिक है। हालांकि निर्धारित लक्ष्य 2,96,875 करोड़ रुपये था, जिसे पूरी तरह हासिल नहीं किया जा सका।

GST से लक्ष्य कम, फिर भी बढ़ी आमदनी
सरकार ने जीएसटी से 1,30,425 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन वास्तविक प्राप्ति 82,547.40 करोड़ रुपये रही। दीपावली से पहले जीएसटी दरों में की गई कटौती को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसके बावजूद पिछले वर्ष की तुलना में जीएसटी से 12.26 करोड़ रुपये अधिक राजस्व मिला है।

आबकारी और अन्य कर बने सहारा
राज्य की कमाई बढ़ाने में आबकारी, स्टांप एवं निबंधन, परिवहन और वैट जैसे करों ने अहम भूमिका निभाई। पिछले वित्तीय वर्ष में आबकारी से 5,147.77 करोड़ रुपये, स्टांप एवं निबंधन से 2,392.52 करोड़ रुपये, परिवहन से 1,721.46 करोड़ रुपये और वैट से 909.81 करोड़ रुपये अधिक राजस्व प्राप्त हुआ।

वित्त मंत्री ने बताया राजस्व बढ़ने का कारण
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि जीएसटी दरों में कमी के चलते अपेक्षित आय नहीं हो सकी, लेकिन इसकी भरपाई अन्य करों, खासकर आबकारी राजस्व से हो गई। उन्होंने इसे वित्तीय अनुशासन और प्रभावी नीतियों का परिणाम बताया।

राज्य बना रेवेन्यू सरप्लस
मंत्री के अनुसार, मजबूत प्रबंधन और नीतिगत फैसलों के चलते उत्तर प्रदेश 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक का रेवेन्यू सरप्लस राज्य बन गया है। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए विभागों से विस्तृत कार्ययोजनाएं मांगी गई हैं, ताकि विकास कार्यों को और गति दी जा सके।

बजट खर्च में भी कमी दर्ज
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 8,08,736.06 करोड़ रुपये के मूल बजट में से करीब 81 प्रतिशत खर्च किया गया। वहीं पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में 8,79,935.44 करोड़ रुपये के कुल बजट के मुकाबले 6,61,207.87 करोड़ रुपये, यानी लगभग 75.14 प्रतिशत ही खर्च हो सका।

पिछले वर्षों में कर संग्रह का ट्रेंड
राज्य में कर संग्रह लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। वर्ष 2021-22 में 1,47,367.74 करोड़ रुपये, 2022-23 में 1,74,087.15 करोड़ रुपये, 2023-24 में 1,93,129.34 करोड़ रुपये, 2024-25 में 2,12,832.08 करोड़ रुपये और 2025-26 में 2,23,060.18 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया गया।

 

एक नज़र