राजस्थान मॉडल पर यूपी के पीलीभीत में बनेगी लैपर्ड सफारी, 49 करोड़ की परियोजना से बदलेगा पर्यटन का नक्शा
पीलीभीत: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राजस्थान के झालाना लैपर्ड रिजर्व की तर्ज पर यहां 49 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक लैपर्ड सफारी पार्क विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद जिले में पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
1716 हेक्टेयर में विकसित होगा लैपर्ड सफारी पार्क
वन एवं वन्यजीव प्रभाग ने इस परियोजना के लिए कुल 1716 हेक्टेयर क्षेत्र में सफारी पार्क विकसित करने की योजना तैयार की है। इसका प्रस्ताव वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री अरुण कुमार को भेजा गया है। यह सफारी पूरनपुर के पास गोपालपुर क्षेत्र और शाहजहांपुर सीमा से लगे पीलीभीत टाइगर रिजर्व के हिस्सों को जोड़कर बनाई जाएगी।
इससे पीलीभीत टाइगर रिजर्व पर बढ़ रहा पर्यटकों का दबाव भी कम होगा और पर्यटकों को एक नया आकर्षक विकल्प मिलेगा।
12 महीने चलेगी सफारी, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
डीएफओ वन एवं वन्यजीव प्रभाग भरत कुमार डीके के अनुसार यह परियोजना टाइगर रिजर्व के बाहर विकसित की जा रही एक अलग पहल है। इसमें 365 दिन सफारी संचालन का प्रस्ताव है, जिससे पूरे साल पर्यटक यहां वन्यजीवों का दीदार कर सकेंगे।
49 करोड़ की लागत से आधुनिक सुविधाएं
इस परियोजना के लिए लगभग 49 करोड़ रुपये की धनराशि की मांग की गई है। पार्क में वन्यजीव चिकित्सा केंद्र, रेस्क्यू एनक्लोजर और आधुनिक पर्यटक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। घायल या रेस्क्यू किए गए तेंदुओं के लिए यहां विशेष उपचार और देखभाल की व्यवस्था होगी।
वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास का अनुभव
सफारी क्षेत्र में नीलगाय समेत अन्य शाकाहारी वन्यजीवों को भी देखा जा सकेगा, जिससे पर्यटकों को प्राकृतिक जंगल का वास्तविक अनुभव मिलेगा। कोर एरिया में विशेष रूप से वन्यजीवों के संरक्षण और उनके सुरक्षित आवास पर ध्यान दिया जाएगा।
राजस्थान मॉडल से मिलेगी प्रेरणा
यह परियोजना राजस्थान के झालाना लैपर्ड सफारी पार्क से प्रेरित है, जो शहरी क्षेत्र के पास विकसित एक सफल मॉडल माना जाता है। पीलीभीत का यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश में अपनी तरह की एक अनूठी पहल होगा।
पर्यटन और रोजगार दोनों को मिलेगा बढ़ावा
सफारी शुरू होने के बाद पीलीभीत का नाम पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत होगा। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, खासकर गाइडिंग, हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन सेवाओं के क्षेत्र में।
इसके साथ ही यह परियोजना मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी मदद करेगी, क्योंकि घायल तेंदुओं के लिए अब स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध होगी।
