तेजस MK2 का दम देख दुनिया दंग! रडार को देगा चकमा, राफेल जैसी रफ्तार के साथ बढ़ाएगा भारत की हवाई ताकत

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बेंगलुरु: बदलते युद्ध स्वरूप के बीच भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को बड़ी तकनीकी सफलता मिली है। रक्षा वैज्ञानिकों ने तेजस MK2 फाइटर जेट को रडार से बचने की क्षमता के मामले में महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई है। दावा किया जा रहा है कि नया लड़ाकू विमान मौजूदा तेजस MK-1A की तुलना में कहीं अधिक कम रडार सिग्नेचर के साथ दुश्मन की निगरानी प्रणालियों को चकमा देने में सक्षम होगा। इसी वजह से इसे चौथी और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। साथ ही इसकी संभावित गति को राफेल के बराबर बताया जा रहा है।

21वीं सदी के रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े सैन्य संघर्षों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्धों में हवाई शक्ति सबसे निर्णायक भूमिका निभा रही है। फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन हमलों ने युद्ध की रणनीतियों को पूरी तरह बदल दिया है। ऐसे माहौल में आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और कम रडार पहचान वाले लड़ाकू विमानों की अहमियत लगातार बढ़ रही है।

तेजस MK2 में 75 फीसदी तक कम होगा रडार सिग्नेचर

एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी द्वारा विकसित किए जा रहे तेजस MK2 में रडार क्रॉस सेक्शन को लेकर बड़ा सुधार किया गया है। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, तेजस MK2 का फ्रंटल रडार क्रॉस सेक्शन मौजूदा तेजस MK-1A की तुलना में लगभग 75 प्रतिशत कम होगा। इसका सीधा मतलब है कि दुश्मन के रडार के लिए इस विमान का पता लगाना पहले के मुकाबले काफी मुश्किल हो जाएगा।

परियोजना निदेशक के अनुसार, तेजस MK2 का फ्रंटल रडार क्रॉस सेक्शन तेजस MK-1A का लगभग एक चौथाई रह जाएगा। स्वतंत्र आकलनों के मुताबिक, बिना बाहरी हथियारों और अतिरिक्त ईंधन टैंकों वाली स्थिति में इसका फ्रंटल रडार क्रॉस सेक्शन 0.1 से 0.2 वर्ग मीटर के बीच हो सकता है, जिसे आधुनिक 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की श्रेणी में बेहद प्रभावशाली माना जाता है।

इन तकनीकों से मिलेगी रडार को धोखा देने की क्षमता

तेजस MK2 के डिजाइन में कई ऐसी उन्नत तकनीकों को शामिल किया गया है जो इसकी रडार पहचान को कम करने में मदद करेंगी। विमान की बाहरी बनावट और किनारों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि रडार तरंगें वापस लौटने के बजाय दूसरी दिशा में बिखर जाएं।

इसके अलावा एस-डक्ट एयर इंटेक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इंजन के कंप्रेसर ब्लेड सीधे रडार की नजर में नहीं आते। लड़ाकू विमानों में कंप्रेसर ब्लेड सबसे बड़े रडार परावर्तक माने जाते हैं।

विमान के पंखों, मुख्य ढांचे और अन्य हिस्सों में 90 प्रतिशत से अधिक कंपोजिट सामग्री का उपयोग किया गया है। यह सामग्री धातु की तुलना में रडार ऊर्जा को अधिक प्रभावी तरीके से अवशोषित करती है। साथ ही स्वदेशी रडार एब्जॉर्बेंट मैटेरियल कोटिंग और चिकनी सतह संरचना भी इसकी कम दृश्यता में अहम भूमिका निभाएगी।

बड़ा आकार, फिर भी कम रडार पहचान

दिलचस्प बात यह है कि तेजस MK2 अपने पूर्ववर्ती MK-1A से आकार में बड़ा होगा। इसमें लंबा फ्यूजलेज, क्लोज-कपल्ड कैनार्ड, अधिक ईंधन क्षमता और ज्यादा हथियार ले जाने की क्षमता होगी। आमतौर पर बड़े आकार के साथ रडार पहचान भी बढ़ जाती है, लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने उन्नत एयरोडायनामिक डिजाइन और कंपोजिट तकनीक के जरिए इस चुनौती को काफी हद तक नियंत्रित किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रडार पहचान में चार गुना तक कमी लाकर तेजस MK2 को उन आधुनिक लड़ाकू विमानों की श्रेणी में पहुंचाने का प्रयास किया गया है जिन्हें कम दृश्यता वाले प्लेटफॉर्म के रूप में देखा जाता है।

हवाई युद्ध में मिलेगी बड़ी रणनीतिक बढ़त

रडार पर देर से दिखाई देने की क्षमता किसी भी लड़ाकू विमान के लिए बड़ी सामरिक ताकत मानी जाती है। इससे दुश्मन के रडार सिस्टम विमान को देर से पहचान पाते हैं और पायलट को कार्रवाई के लिए अधिक समय मिलता है। विशेष रूप से लंबी दूरी के हवाई युद्ध में यह क्षमता भारतीय वायुसेना को महत्वपूर्ण बढ़त दिला सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि विमान को पूरी तरह हथियारों और अतिरिक्त ईंधन टैंकों से लैस करने के बाद भी कम रडार सिग्नेचर बनाए रखना सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती बनी हुई है। इसी दिशा में डिजाइन और तकनीकी सुधारों पर लगातार काम किया जा रहा है।

भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा नया लड़ाकू विमान

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, तेजस MK2 भारतीय वायुसेना की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विशेष रूप से तब तक, जब तक उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान कार्यक्रम पूरी तरह परिपक्व नहीं हो जाता।

इस विमान में जीई एफ414 इंजन, ‘उत्तम’ एईएसए रडार और कई आधुनिक प्रणालियां शामिल होंगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कम रडार पहचान, अत्याधुनिक सेंसर, अधिक हथियार क्षमता और संभावित सुपरक्रूज क्षमता के कारण तेजस MK2 आने वाले वर्षों में भारत की हवाई शक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।

THAAD और आयरन डोम को लेकर क्या है दावा?

रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि कम रडार सिग्नेचर और उन्नत तकनीकों के कारण तेजस MK2 भविष्य में आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौतीपूर्ण लक्ष्य साबित हो सकता है। हालांकि विमान के वास्तविक प्रदर्शन और विभिन्न रक्षा प्रणालियों के खिलाफ उसकी प्रभावशीलता का आकलन परिचालन परीक्षणों और युद्धक परिस्थितियों में ही स्पष्ट हो सकेगा।

 

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