पेपर लीक पर बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, NEET समेत परीक्षा मामलों के लिए 25 फास्ट-ट्रैक अदालतों को मंजूरी

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मुंबई: प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने NEET समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए 25 विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन को मंजूरी दी है। इन अदालतों का उद्देश्य परीक्षा संबंधी अपराधों का समयबद्ध निपटारा करना और दोषियों के खिलाफ त्वरित न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।

23 नई अदालतें, दो का पहले ही हो चुका था गठन

हाईकोर्ट की मंजूरी के तहत कुल 25 विशेष अदालतों में से 23 नई अदालतें महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों में स्थापित की जाएंगी। जबकि औरंगाबाद और नागपुर की दो विशेष अदालतों की अधिसूचना पहले ही 24 जुलाई को जारी की जा चुकी थी। इन अदालतों में पेपर लीक, परीक्षा में धोखाधड़ी और अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी।

इन कानूनों के तहत होगी मामलों की सुनवाई

विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें मुख्य रूप से तीन प्रमुख कानूनों के तहत दर्ज मामलों का निपटारा करेंगी। इनमें लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के संबंधित प्रावधान और महाराष्ट्र विश्वविद्यालय, बोर्ड एवं अन्य निर्दिष्ट परीक्षाएं (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 1982 शामिल हैं। इन कानूनों के अंतर्गत दर्ज मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता दी जाएगी।

कई जिलों में विशेष न्यायाधीशों की तैनाती

बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से जारी सूची के अनुसार मुंबई (सिटी सिविल कोर्ट और विक्रोली), पुणे, ठाणे, नासिक, कोल्हापुर, बीड़, चंद्रपुर, धुले, गढ़चिरौली, गोंदिया, जलगांव, जालना, उस्मानाबाद, परभणी, सांगली, सातारा, सोलापुर, वर्धा, यवतमाल, वाशिम और नंदुरबार समेत कई जिलों में विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की गई है।

इन अधिकारियों को मिली विशेष जिम्मेदारी

पुणे में भ्रष्टाचार निवारण अदालत की प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट यू. एस. एम. अल अमूदी और पिंपरी-चिंचवड़ के संयुक्त सिविल जज आर. आर. शेरेकर को विशेष अदालतों का दायित्व सौंपा गया है। वहीं मुंबई सिटी सिविल एंड सेशंस कोर्ट के न्यायाधीश ए. ए. नंदगांवकर और विक्रोली कोर्ट की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पी. वी. हिंगणे को भी इन मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी दी गई है।

परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने पर रहेगा फोकस

विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन का मुख्य उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों से जुड़े मामलों का शीघ्र निपटारा करना, दोषियों के खिलाफ समयबद्ध न्यायिक कार्रवाई सुनिश्चित करना और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता के साथ अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत करना है।

 

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