यूपी में रेंट एग्रीमेंट कराना हुआ सस्ता, अब 2 हजार में होगा रजिस्ट्रेशन; 10 साल के अनुबंध पर भी बड़ी राहत

cm-yogi-government-1789535903462

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने मकान मालिकों और किरायेदारों को बड़ी राहत देते हुए रेंट एग्रीमेंट के पंजीकरण का खर्च स्थायी रूप से कम कर दिया है। अब एक साल के रेंट एग्रीमेंट को रजिस्टर्ड कराने के लिए सिर्फ 2 हजार रुपये खर्च करने होंगे। वहीं, 10 लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये वाले 10 साल के अनुबंध पर 90 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी।

एक साल के रेंट एग्रीमेंट पर सिर्फ 2 हजार रुपये

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में रेंट एग्रीमेंट के पंजीकरण शुल्क में राहत देने का फैसला किया गया। सरकार के मुताबिक, अब एक साल के लिए 2 लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये वाले अनुबंध को रजिस्टर्ड कराने में सिर्फ 2 हजार रुपये लगेंगे।

इसमें 1 हजार रुपये स्टांप शुल्क और 1 हजार रुपये रजिस्ट्रेशन फीस शामिल होगी। इससे पहले इसी तरह के रेंट एग्रीमेंट के पंजीकरण पर करीब 10 हजार रुपये खर्च होते थे।

10 साल के अनुबंध पर भी बड़ी राहत

10 साल के लिए 10 लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये वाले रेंट एग्रीमेंट पर अब सिर्फ 26 हजार रुपये खर्च होंगे। पहले ऐसे अनुबंध के पंजीकरण में करीब 2 लाख रुपये तक का खर्च आता था।

स्टांप एवं पंजीयन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार रवीन्द्र जायसवाल ने बताया कि सरकार ने उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 को पूरी तरह लागू करने के साथ ही मकान मालिक और किरायेदारों को राहत देने का फैसला किया है।

एक साल से ज्यादा की किरायेदारी का रजिस्ट्रेशन जरूरी

एक साल से अधिक अवधि की किरायेदारी के कागजात का रजिस्ट्रेशन कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसके लिए निर्धारित स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान करना होता है। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो स्टांप वाद दायर होने के साथ बकाया स्टांप शुल्क और अन्य देनदारी का भुगतान करना पड़ सकता है।

किस अवधि के लिए कितना खर्च आएगा

औसत वार्षिक किराये के आधार पर रेंट एग्रीमेंट के पंजीकरण का खर्च अब इस तरह रहेगा:

अवधि 2 लाख रुपये तक 2 से 6 लाख रुपये 6 से 10 लाख रुपये
एक वर्ष तक 2,000 रुपये 6,000 रुपये 9,000 रुपये
एक से पांच वर्ष तक 4,000 रुपये 12,000 रुपये 20,000 रुपये
पांच से 10 वर्ष तक 8,000 रुपये 16,000 रुपये 26,000 रुपये

10 लाख से ज्यादा किराये पर नहीं मिलेगी छूट

सरकार के मुताबिक, 10 लाख रुपये से अधिक के वार्षिक किराये वाले अनुबंध पर यह छूट लागू नहीं होगी। 10 लाख रुपये तक के किराये पर छूट देने के बाद बची हुई किराया राशि पर मौजूदा व्यवस्था के अनुसार स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी।

टोल टैक्स या खनन से जुड़े पट्टों यानी लीज के मामलों में भी यह छूट लागू नहीं होगी।

पहले छह महीने के लिए मिली थी छूट

रवीन्द्र जायसवाल के मुताबिक, पिछले साल 19 नवंबर से छह महीने की अवधि के लिए रेंट एग्रीमेंट के पंजीकरण में छूट दी गई थी। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद अब इसे स्थायी रूप से लागू करने का फैसला किया गया है।

हालांकि, पहले दी गई छूट से करीब 8.31 करोड़ रुपये की राजस्व हानि हुई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए स्थायी व्यवस्था में छूट की सीमा कुछ कम की गई है। पहले रेंट एग्रीमेंट का खर्च 1 हजार से 20 हजार रुपये तक तय था, जबकि अब यह 2 हजार से 26 हजार रुपये तक होगा।

कम खर्च के कारण बढ़ सकता है रजिस्ट्रेशन

रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट कराने में पहले औसत वार्षिक किराये का चार प्रतिशत से ज्यादा खर्च आता था। इसी वजह से कई मकान मालिक और किरायेदार रेंट एग्रीमेंट को रजिस्टर्ड कराने से बचते थे।

वहीं, एक साल से कम अवधि के रेंट एग्रीमेंट के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं है। ऐसे मामलों में अक्सर 100 रुपये के स्टांप पेपर पर ही समझौता कर लिया जाता है। किरायेदारी को लेकर विवाद होने पर मकान मालिकों को थाने से लेकर अदालत तक जाना पड़ सकता है। ऐसे में रजिस्टर्ड एग्रीमेंट दोनों पक्षों के लिए कानूनी तौर पर ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

 

एक नज़र