UPI पर नए शुल्क को लेकर मायावती का केंद्र पर हमला, महंगाई-बेरोजगारी का मुद्दा उठाकर बोलीं- बोझ आम जनता पर पड़ेगा
लखनऊ: यूपीआई के जरिए होने वाले कुछ बड़े व्यापारी भुगतान पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। मायावती ने इस व्यवस्था को आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला बताया। उन्होंने महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी उठाए।
मायावती ने यूपीआई शुल्क को बताया अतिरिक्त बोझ
मायावती ने कहा कि सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के बाद अब यूपीआई के कुछ लेनदेन पर शुल्क की नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। उनके मुताबिक इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है और लोगों में असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है।
मायावती ने महंगाई और बेरोजगारी का जिक्र करते हुए कहा कि देश की बड़ी आबादी पहले से ही आर्थिक परेशानियों से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में सरकार की नीतियों का जोर लाभ कमाने के बजाय जनकल्याण पर होना चाहिए।
महंगाई और बेरोजगारी को लेकर भी घेरा
मायावती ने कहा कि गरीब और महंगाई से परेशान लोगों के बच्चों को अशिक्षा और बेरोजगारी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार जनता की आर्थिक तंगी और परेशानियों की चिंता नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा।
स्मार्ट स्कूल योजना का स्वागत, लेकिन सरकार को दी नसीहत
मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार की करीब 14,500 स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने की योजना का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि करीब 300 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना के साथ बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाओं पर भी ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने स्कूलों में छत, बेंच-कुर्सी, किताबें, शौचालय, खेल का मैदान और साफ-सफाई जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने की बात कही। मायावती ने सवाल उठाया कि क्या प्रति स्कूल करीब दो लाख रुपये के खर्च में ये सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
2000 रुपये से ज्यादा के कुछ UPI भुगतान पर MDR
नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ व्यक्ति से व्यापारी वाले UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। यह शुल्क व्यापारी से लिया जाएगा, जबकि व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के ऐसे लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है।
सरकार के अनुसार MDR को कर नहीं माना गया है और इसे सीधे सरकार द्वारा वसूल नहीं किया जाएगा। वहीं, छोटे कारोबारियों और कुछ श्रेणियों के लेनदेन को इस शुल्क से छूट दी गई है।
