बच्चे को संस्कारी बनाने का सही तरीका क्या है? 5 साल तक इन बातों पर दें ध्यान, 21 साल तक ऐसे करें परवरिश

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नई दिल्ली: हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अच्छा व्यवहार करने वाला और संस्कारी बने। बच्चे की आदतें और व्यवहार बचपन से ही आकार लेने लगते हैं। घर का माहौल, माता-पिता का व्यवहार, खान-पान, दोस्तों की संगति और रोजमर्रा की दिनचर्या उसके व्यक्तित्व को प्रभावित कर सकती है। इसलिए बढ़ती उम्र के साथ बच्चे को अलग-अलग तरह से अच्छी आदतें और जिम्मेदारियां सिखाना जरूरी माना जाता है।

बच्चे की परवरिश में सबसे अहम भूमिका माता-पिता के अपने व्यवहार की होती है। बच्चे अक्सर अपने आसपास के लोगों की बातों और व्यवहार की नकल करते हैं। ऐसे में उनसे अच्छे व्यवहार की उम्मीद करने के साथ माता-पिता को भी अपने आचरण का ध्यान रखना चाहिए।

5 साल तक खान-पान और व्यवहार पर दें ध्यान

बच्चे के जीवन के शुरुआती पांच साल महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान उसकी खाने-पीने की आदतें विकसित होती हैं। कोशिश करें कि बच्चे को पौष्टिक और घर का बना भोजन दिया जाए। बहुत ज्यादा फास्ट फूड, तला-भुना और जरूरत से ज्यादा मसालेदार खाना देने से बचें।

इस उम्र में बच्चे आसपास के लोगों की बातों और व्यवहार की नकल भी करते हैं। इसलिए माता-पिता को बच्चे के सामने अच्छे शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए और शांत तरीके से व्यवहार करना चाहिए।

6 से 10 साल में सिखाएं सही और गलत का फर्क

6 से 10 साल की उम्र में बच्चा अच्छी और बुरी आदतों के बीच अंतर समझना शुरू करता है। इस समय उसे घर के नियमों, बड़ों के सम्मान, दूसरों की मदद और सही व्यवहार के बारे में समझाया जा सकता है।

बच्चे को हर गलती पर डांटने के बजाय प्यार से सही और गलत का अंतर समझाना बेहतर तरीका हो सकता है। साथ ही माता-पिता को खुद भी वही व्यवहार अपनाना चाहिए, जिसकी उम्मीद वे अपने बच्चे से करते हैं।

11 से 15 साल में समझें बच्चे की रुचि

11 से 15 साल की उम्र में बच्चे पढ़ाई, भविष्य और करियर को लेकर अपनी पसंद बनाने लगते हैं। इस दौरान माता-पिता को उसकी रुचि समझने की कोशिश करनी चाहिए और अपनी पसंद उस पर थोपने से बचना चाहिए।

पढ़ाई के साथ बच्चे को योग, ध्यान या प्रार्थना जैसी अच्छी आदतों के लिए भी प्रेरित किया जा सकता है। इस उम्र में बच्चे से उसकी परेशानियों, पसंद और विचारों को लेकर खुलकर बातचीत करना भी जरूरी है, ताकि वह अपनी बातें परिवार के साथ साझा कर सके।

17 से 21 साल में जिम्मेदारी देना जरूरी

किशोरावस्था के बाद बच्चे में सोच और व्यवहार को लेकर कई बदलाव आते हैं। इस उम्र में उसे छोटी-बड़ी जिम्मेदारियां खुद संभालने का अवसर देना चाहिए। माता-पिता जरूरत पड़ने पर मार्गदर्शन करें, लेकिन हर फैसला बच्चे की जगह खुद लेने से बचें।

इस दौरान बच्चे की संगति और दिनचर्या पर भी ध्यान देना जरूरी है। परिवार के बुजुर्गों के साथ समय बिताने और उनके अनुभवों से सीखने के लिए उसे प्रोत्साहित किया जा सकता है। उम्र बढ़ने के साथ बच्चे को सही फैसले लेने और अपनी जिम्मेदारियां समझने का अवसर देना उसकी परवरिश का अहम हिस्सा हो सकता है।

 

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