देश की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने को भी रहें तैयार, वाराणसी में बोले योगी आदित्यनाथ

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वाराणसी: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शस्त्र केवल पूजा की वस्तु नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर उन्हें धारण करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांति के समय धर्म का स्वरूप संयम, सौहार्द और लोककल्याण होता है, लेकिन देश और धर्म की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए। देश और धर्म के लिए किया गया हर त्याग महान है।

योगी आदित्यनाथ बुधवार को वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संन्यासी का जीवन धर्म के लिए समर्पित होता है और वह धन के लिए धर्म का त्याग नहीं करता। युद्ध की स्थिति में संन्यासी भी शस्त्र धारण करते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में तैयार रहना जरूरी है।

शस्त्र पूजन के साथ राष्ट्र रक्षा का भी संदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ में मां भगवती की पूजा केवल धूप और दीप जलाकर नहीं होती, बल्कि शस्त्रों का पूजन भी किया जाता है। उन्होंने जोर दिया कि धार्मिक आस्था के साथ राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध भी जरूरी है।

योगी ने संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने देश-विदेश में सनातन मूल्यों और ऋषि परंपरा का प्रसार किया। स्वामी प्रणवानंद ने गोरखपुर में गोरक्षपीठ के तत्कालीन सिद्धयोगी बाबा गंभीरनाथ से दीक्षा ली थी और इसके बाद काशी में भारत सेवाश्रम संघ की स्थापना की। आगे चलकर देश के विभिन्न हिस्सों में इसकी शाखाएं स्थापित हुईं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में हिंदू विरोधी सरकार के दौर में भी संघ के संन्यासी सनातन मूल्यों और हिंदू समाज के हितों के लिए डटे रहे।

राष्ट्र पर संकट का असर सांस्कृतिक विरासत पर भी पड़ता है

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब राष्ट्र संकट में होता है, तो उसकी आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत भी प्रभावित होती है। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर, अयोध्या में राम जन्मभूमि और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि विदेशी आक्रांताओं को सफलता नहीं मिलती, तो क्या इन धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं होतीं?

उन्होंने कहा कि आपसी बंटवारे के दुष्परिणाम देश को भुगतने पड़े। इसी पृष्ठभूमि में संतों ने आध्यात्मिक साधना को राष्ट्रीय जागरण का माध्यम बनाया।

काशी विश्वनाथ धाम और राम मंदिर को राष्ट्रीय चेतना से जोड़ा

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम का विकास और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण राष्ट्रीय चेतना और संकल्प का परिणाम है। उन्होंने धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को देश की सामूहिक चेतना से जोड़ते हुए संत समाज की भूमिका को रेखांकित किया।

100 परिवारों को बांटी गईं सिलाई मशीनें

भारत सेवाश्रम संघ के शताब्दी समारोह में 100 परिवारों को सिलाई मशीनें दी गईं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं पांच परिवारों को मशीनें सौंपीं। उन्होंने कहा कि यह पहल परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर तथा विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप है।

योगी ने प्रयागराज कुंभ के दौरान संघ की अन्नक्षेत्र सेवा और देशभर में चल रही उसकी लोककल्याणकारी गतिविधियों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि शांति के समय सेवा, संयम और लोककल्याण के जरिए समाज को मजबूत बनाना ही आध्यात्मिक साधना की सार्थकता है।

 

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