लखनऊ की आन्या सिंह ने बढ़ाया शहर का मान, किश्वर मेमोरियल निबंध प्रतियोगिता में साझा प्रथम पुरस्कार
आन्या के पैतृक परिवार की जड़ें जौनपुर जिले के तिरकौली गांव में हैं, जबकि उनका ननिहाल शाहगंज से जुड़ा है। निबंध में उन्होंने दोनों परिवारों की पांच पीढ़ियों की जीवन यात्रा को दर्ज किया है। इसमें बताया गया है कि अलग-अलग समय में परिवारों ने किन चुनौतियों का सामना किया और परिस्थितियों के बदलाव के साथ अपने जीवन को किस तरह ढाला।
पांच पीढ़ियों की कहानी को शब्दों में पिरोया
आन्या ने पारिवारिक स्मृतियों, पूर्वजों के अनुभवों और पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ी परंपराओं के आधार पर इतिहास को समझने का प्रयास किया है। उनके लेखन में परिवार के व्यक्तिगत अनुभवों के साथ उन सामाजिक और सांस्कृतिक बदलावों को भी जगह मिली है, जिन्होंने समय के साथ परिवारों की जीवनशैली और सोच को प्रभावित किया।
उनका निबंध इस बात को सामने लाता है कि परिवारों की यादें, अनुभव और परंपराएं भी इतिहास को समझने के महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं। इनके व्यवस्थित दस्तावेजीकरण से स्थानीय इतिहास और पूर्वजों के जीवन से जुड़ी जानकारियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सकता है।
परिवार और स्थानीय इतिहास के संरक्षण पर जोर
प्रतियोगिता का विषय ‘टेक अ डीप डाइव इनटू योर ओन फैमिली/विलेज/टाउन/सिटी हिस्ट्री’ था। इसका उद्देश्य लोगों को अपने परिवार, गांव, कस्बे और शहर के इतिहास पर शोध करने तथा उसे दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित करना है। प्रतियोगिता में मौखिक इतिहास, पारिवारिक अभिलेखों, वंशावलियों और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया।
इसमें विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों और विभिन्न विषयों के विद्वानों के साथ उन लोगों को भी भाग लेने का अवसर दिया गया, जिनके पास औपचारिक शैक्षणिक डिग्री नहीं है, लेकिन पारिवारिक इतिहास और वंशावली से जुड़ा पारंपरिक ज्ञान है।
प्रतियोगिता में भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में निबंध भेजने की अनुमति थी। प्रविष्टियों के लिए न्यूनतम शब्द सीमा 5,000 रखी गई थी, जबकि अधिकतम शब्द सीमा तय नहीं की गई थी। पुस्तक के आकार की पांडुलिपियों को भी प्रोत्साहित किया गया। ट्रस्ट ने प्रतियोगिता के लिए 11 हजार रुपये से लेकर 1 लाख 1 हजार रुपये तक के पुरस्कार निर्धारित किए हैं। इसमें आयु और शैक्षणिक योग्यता की कोई बाध्यता नहीं है। इसे वार्षिक प्रतियोगिता के रूप में आयोजित करने की भी योजना है।
विशेषज्ञों ने किया निर्णायक मंडल में शामिल होकर मूल्यांकन
प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस की प्राचार्य प्रो. बिजयलक्ष्मी नंदा, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता पी. एन. मिश्रा, इंडिका के निदेशक और फ्लेम विश्वविद्यालय के पूर्व वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. नागराज पाटुरी, भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के कंप्यूटर विज्ञान विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर के. गोपीनाथ और ‘मनुषी’ की संस्थापक मधु किश्वर शामिल थीं।
इस प्रतियोगिता में साझा प्रथम पुरस्कार प्राप्त करने वाले अन्य दो विजेताओं में डॉ. शुद्धतम प्रकाश जैन और तन्वी शाह भी शामिल हैं।
परिवार में खुशी और गर्व का माहौल
डॉ. अमित कुमार सिंह और मिली सिंह की पुत्री आन्या की इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है। उनके दादा सत्य नारायण सिंह और नाना विनोद कुमार सिंह ने भी उनकी सफलता पर प्रसन्नता जताई है। आन्या ने अपने शोध और लेखन के माध्यम से तिरकौली गांव और शाहगंज से जुड़ी पारिवारिक जड़ों की पांच पीढ़ियों की कहानी को दर्ज किया है। उनकी यह उपलब्धि पारिवारिक स्मृतियों और स्थानीय इतिहास को सहेजने के महत्व को रेखांकित करती है।
