पतली कमर के लिए पसलियों का आकार बदलवा रहीं महिलाएं! क्या है रिब रीमॉडलिंग सर्जरी, जिसके जोखिम जानकर चौंक जाएंगे आप

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नई दिल्ली: पतली कमर और आकर्षक शारीरिक बनावट पाने की चाह में कॉस्मेटिक सर्जरी का चलन बढ़ रहा है। अब इस दिशा में रिब रीमॉडलिंग सर्जरी भी चर्चा में है, जिसमें कमर को पतला दिखाने के लिए निचली पसलियों की स्थिति और आकार में बदलाव किया जाता है। सोशल मीडिया पर इस प्रक्रिया को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच इसके संभावित खतरों पर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों के लिए सबसे अहम चिंता यह है कि शरीर की हड्डियों में बदलाव करने वाली इस सर्जरी के दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर अभी पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।

क्या होती है रिब रीमॉडलिंग सर्जरी?

रिब रीमॉडलिंग एक कॉस्मेटिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य कमर का घेरा छोटा दिखाना होता है। इसमें निचली पसलियों के आकार और स्थिति में बदलाव किया जाता है। इस प्रक्रिया में मरीज को जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है और छोटे चीरे लगाकर विशेष उपकरणों की मदद से निचली पसलियों की बाहरी परत को कमजोर किया जाता है। इसके बाद पसलियों को अंदर की ओर मोड़ने की कोशिश की जाती है, ताकि कमर अपेक्षाकृत पतली नजर आए।

सर्जरी के बाद भी आसान नहीं होता सफर

इस प्रक्रिया के बाद मरीज को लंबे समय तक सावधानी बरतनी पड़ सकती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, हड्डियों को नई स्थिति में बनाए रखने के लिए करीब तीन महीने तक रोजाना 23 घंटे एक विशेष मेडिकल-ग्रेड कॉर्सेट पहनने की जरूरत हो सकती है। इस दौरान शरीर को बदली हुई संरचना के अनुरूप ठीक होने का समय दिया जाता है। यानी यह प्रक्रिया केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके बाद भी लंबे समय तक देखभाल की जरूरत पड़ सकती है।

सोशल मीडिया ने बढ़ाई रिब रीमॉडलिंग की चर्चा

सोशल मीडिया पर आकर्षक शारीरिक बनावट और कॉस्मेटिक प्रक्रियाओं को लेकर बढ़ती चर्चा ने रिब रीमॉडलिंग की ओर भी लोगों का ध्यान खींचा है। रिपोर्ट के अनुसार, एक महिला इन्फ्लुएंसर ने इस सर्जरी पर 13 लाख रुपये से अधिक खर्च करने की बात कही है। वह पहले भी कई कॉस्मेटिक सर्जरी करवा चुकी हैं।

एक अन्य इन्फ्लुएंसर का दावा है कि उन्होंने कमर का ऐसा आकार पाने के लिए यह प्रक्रिया करवाई, जिसे उनके मुताबिक व्यायाम और खानपान से हासिल करना संभव नहीं था। हालांकि, सोशल मीडिया पर साझा किए गए ऐसे अनुभवों को सर्जरी की सुरक्षा या उसके परिणामों का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

कब शुरू हुई यह तकनीक और कितनी हुईं सर्जरी?

रिपोर्ट में दी गई जानकारी के अनुसार, रिब रीमॉडलिंग तकनीक को वर्ष 2022 में पेरू के प्लास्टिक सर्जन डॉ. राउल मेंजानेडो सिप्रियानी ने विकसित किया था। इसके बाद से दुनियाभर में इस तरह की करीब 5,000 सर्जरी होने का अनुमान बताया गया है। हालांकि, इस प्रक्रिया के शरीर पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों और संभावित जटिलताओं को लेकर अभी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है।

रिब रीमॉडलिंग सर्जरी के क्या हैं गंभीर खतरे?

पसलियों के आसपास की संरचना में बदलाव के कारण कुछ गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इनमें न्यूमोथोरैक्स और हीमोथोरैक्स जैसी स्थितियां शामिल हैं।

न्यूमोथोरैक्स में फेफड़े और छाती की दीवार के बीच हवा जमा हो जाती है, जिससे फेफड़े पर दबाव पड़ सकता है। वहीं, हीमोथोरैक्स में इसी जगह खून जमा होने लगता है। दोनों स्थितियां गंभीर हो सकती हैं और समय पर इलाज नहीं मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती हैं।

इसके अलावा, हड्डियों के गलत तरीके से जुड़ने, अपनी जगह से खिसकने या अपेक्षित आकार नहीं मिलने का जोखिम भी रहता है। सर्जरी के बाद होने वाली जटिलताओं और शरीर की प्रतिक्रिया के आधार पर परिणाम अलग-अलग हो सकते हैं।

सिर्फ पतली कमर के लिए जोखिम उठाना कितना उचित?

रिब रीमॉडलिंग जैसी कॉस्मेटिक प्रक्रिया पर विचार करने से पहले इसके संभावित लाभ, जोखिम, रिकवरी में लगने वाला समय और दीर्घकालिक प्रभावों को समझना जरूरी है। सोशल मीडिया पर दिखने वाले परिणाम हर व्यक्ति के लिए समान हों, यह जरूरी नहीं है। किसी भी सर्जरी का निर्णय केवल तस्वीरों, इन्फ्लुएंसर के अनुभव या आकर्षक दावों के आधार पर नहीं लेना चाहिए। इसके लिए योग्य प्लास्टिक सर्जन से परामर्श लेकर अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार जोखिमों की जानकारी लेना महत्वपूर्ण है।

 

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