ईरान की मिसाइलें घटने का ट्रंप का दावा, ड्रोन फैक्ट्रियों पर भी संकट! शांति वार्ता को लेकर बढ़ी हलचल
ट्रंप ने ईरान की सैन्य ताकत को लेकर क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता पहले जैसी नहीं रह गई है। उनके मुताबिक, ईरान के पास अब भी मिसाइलें हैं, लेकिन उनकी संख्या में काफी कमी आई है। उन्होंने दावा किया कि बिजली की आपूर्ति प्रभावित होने से ड्रोन निर्माण करने वाली फैक्ट्रियों का काम भी मुश्किल हो गया है।
ट्रंप ने मौजूदा संघर्ष को ऐसी समस्या बताया, जिसका समाधान उनके राष्ट्रपति बनने से पहले ही हो जाना चाहिए था। हालांकि, ईरान की मिसाइलों की मौजूदा संख्या और ड्रोन उत्पादन पर बिजली संकट के प्रभाव को लेकर उनके दावों के समर्थन में विस्तृत आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसलिए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
परमाणु वार्ता के बीच शुरू हुई थी सैन्य कार्रवाई
इस संघर्ष की पृष्ठभूमि में ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी प्रमुख मुद्दा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। उस समय ओमान की मध्यस्थता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत चल रही थी।
इससे पहले भी परमाणु वार्ता के दौरान ईरान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की घटना सामने आई थी। ऐसे घटनाक्रमों के कारण कूटनीतिक प्रयासों और पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की संभावनाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
क्या ईरान के साथ शांति वार्ता का रास्ता खुल सकता है?
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत को लेकर भी चर्चा हो रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रजाई को पत्र भेजा था। बताया गया कि पत्र के जरिए बातचीत की रूपरेखा पर चर्चा करने की कोशिश की गई।
हालांकि, ट्रंप ने इस खबर पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका वास्तविक उद्देश्य चिकित्सा आपूर्ति से जुड़ा था। इस मामले में अलग-अलग दावों के बीच शांति वार्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अभी तक किसी ठोस समझौते या निर्णायक कूटनीतिक प्रगति की पुष्टि नहीं हुई है।
परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक राहत पर अटका मामला
ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसे मिलने वाली आर्थिक राहत जैसे मुद्दे संभावित वार्ता के अहम हिस्से हो सकते हैं। दोनों देशों के बीच इन विषयों पर सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ अमेरिका सैन्य दबाव बनाए रखने के संकेत दे रहा है, तो दूसरी तरफ बातचीत की संभावनाओं को लेकर भी खबरें सामने आ रही हैं।
इस संघर्ष का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसके प्रभाव को लेकर चिंता बनी हुई है। अब देखना होगा कि सैन्य टकराव के बीच कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ती है या तनाव और गहराता है।
