अधिकमास पूर्णिमा 2026: कल होगा स्नान-दान, जानें ब्रह्म मुहूर्त सहित पूरे शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

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नई दिल्ली: अधिकमास की पूर्णिमा को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यह पूर्णिमा लगभग तीन साल में एक बार आती है और इस दिन किया गया स्नान, दान और जप-तप सामान्य पूर्णिमा की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी माना जाता है। इस वर्ष अधिकमास पूर्णिमा का व्रत आज रखा जा रहा है, जबकि स्नान-दान कल 31 मई 2026 को किया जाएगा।

व्रत आज, स्नान-दान कल क्यों किया जाएगा?
पंचांग के अनुसार, आज सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो रही है और आज रात चंद्रोदय के समय भी यह तिथि विद्यमान रहेगी। इसी कारण आज व्रत रखा जा रहा है। वहीं, यह पूर्णिमा तिथि 31 मई दोपहर 2 बजकर 14 मिनट तक रहेगी, जिससे कल सूर्योदय के समय भी पूर्णिमा बनी रहेगी। परंपरा के अनुसार, जब सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि होती है, तब उसी दिन स्नान और दान का महत्व होता है।

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का है विशेष महत्व
अधिकमास पूर्णिमा पर स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। कल 31 मई को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 3 मिनट से शुरू होकर 4 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इस समय पवित्र नदियों में स्नान और उसके बाद दान करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

अमृत काल और अभिजीत मुहूर्त भी शुभ
यदि कोई व्यक्ति ब्रह्म मुहूर्त में स्नान नहीं कर पाता है तो अमृत काल में भी स्नान कर सकता है, जो सुबह 4 बजकर 33 मिनट से 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में भी स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है, जो सुबह 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा।

दान का महत्व और धार्मिक मान्यता
स्नान के बाद अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, जल, पंखा और फल आदि का दान करने की परंपरा है। मान्यता है कि अधिकमास पूर्णिमा के दिन किया गया दान और पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है और सभी प्रकार के कष्टों का नाश करता है।

 

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