UP RERA का बड़ा फैसला: अब फ्लैट ट्रांसफर सिर्फ 1000 रुपये में, बिल्डरों की मनमानी पर लगी लगाम; नई दरें तय
लखनऊ, 06 मई 2026। उत्तर प्रदेश में फ्लैट ट्रांसफर के नाम पर बिल्डरों द्वारा वसूली जाने वाली भारी-भरकम रकम पर अब रोक लग गई है। उत्तर प्रदेश रेरा (UP RERA) ने बड़ा कदम उठाते हुए ट्रांसफर शुल्क को पूरी तरह नियंत्रित कर दिया है। नए नियमों के तहत अब पारिवारिक उत्तराधिकार में फ्लैट ट्रांसफर सिर्फ 1000 रुपये में किया जा सकेगा, जबकि बाहरी व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर के लिए अधिकतम 5000 रुपये तक शुल्क निर्धारित किया गया है।
बिल्डरों की मनमानी वसूली पर लगी रोक
यूपी रेरा के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने जानकारी दी कि पहले बिल्डर फ्लैट ट्रांसफर के नाम पर प्रति वर्गफुट 200 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक वसूलते थे, जिससे कुल राशि 25 से 30 लाख रुपये तक पहुंच जाती थी। कई मामलों में शिकायत मिलने के बाद जांच में यह पाया गया कि जब खरीदार ने पूरी रकम चुका दी होती है, तो अतिरिक्त शुल्क वसूलना पूरी तरह अवैध है।
19 हजार मामलों में 8 हजार करोड़ रुपये की वापसी
यूपी रेरा ने अब तक करीब 19 हजार से अधिक मामलों में हस्तक्षेप करते हुए आवंटियों को लगभग 8 हजार करोड़ रुपये की राहत दिलाई है। यह कदम रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
विनियम 47 में संशोधन, नए नियम लागू
इस मामले में यूपी रेरा ने विनियम 47 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है, जो प्रशासनिक शुल्क और मानक फीस से संबंधित है। संशोधित नियमों के तहत अब आवंटन के उत्तराधिकार या ट्रांसफर से जुड़े मामलों में प्रमोटर द्वारा लिए जाने वाले शुल्क को पूरी तरह नियंत्रित कर दिया गया है।
पारिवारिक ट्रांसफर में सिर्फ 1000 रुपये शुल्क
नए नियमों के अनुसार यदि आवंटी की मृत्यु के बाद फ्लैट का ट्रांसफर उसके कानूनी उत्तराधिकारी (परिवार के सदस्य) के नाम किया जाता है, तो अधिकतम 1000 रुपये प्रोसेसिंग फीस ही ली जा सकेगी। इसके लिए मृत्यु प्रमाण पत्र, उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र और अन्य कानूनी दस्तावेज आवश्यक होंगे।
बाहरी व्यक्ति को ट्रांसफर पर 5000 रुपये की सीमा
यदि फ्लैट का ट्रांसफर किसी बाहरी व्यक्ति के नाम किया जाता है, तो अधिकतम 5000 रुपये तक का शुल्क ही लिया जा सकेगा। इसके अलावा किसी भी प्रकार की अतिरिक्त वसूली पर रोक रहेगी।
नए प्रावधानों से आम खरीदारों को बड़ी राहत
UP RERA के इस फैसले को रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है। इससे न केवल बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगेगी, बल्कि आम घर खरीदारों को भी सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
