₹500 करोड़ की बड़ी सौगात! IIT कानपुर में बनेगा नेशनल मिलिट्री ड्रोन हब, यूपी बनेगा देश का डिफेंस टेक्नोलॉजी सेंटर
कानपुर: उत्तर प्रदेश को रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्रालय ने आईआईटी कानपुर में करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से ‘नेशनल मिलिट्री ड्रोन टेक्नोलॉजी हब’ स्थापित करने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के जरिए प्रदेश को देश के प्रमुख रक्षा नवाचार केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
योगी सरकार की पहल पर तैयार किए गए प्रस्ताव को हाल ही में रक्षा मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद मंत्रालय ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दे दी। माना जा रहा है कि यह केंद्र सैन्य ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में भारत की क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सैन्य ड्रोन तकनीक पर होगा अत्याधुनिक अनुसंधान
प्रस्तावित केंद्र में सैन्य पेलोड, डेटा लिंक, ग्राउंड स्टेशन और काउंटर ड्रोन सिस्टम के डिजाइन, परीक्षण और प्रमाणीकरण पर कार्य किया जाएगा। इसके अलावा सेना की मारक क्षमता बढ़ाने वाले अत्याधुनिक ड्रोन विकसित करने पर विशेष फोकस रहेगा।
यहां रडार से बच निकलने में सक्षम नैनो-मैटेरियल आधारित ड्रोन, कामिकाजी ड्रोन और अन्य उन्नत सैन्य तकनीकों पर भी शोध किया जाएगा। साथ ही स्वदेशी मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) की नई पीढ़ी की तकनीक विकसित करने के लिए अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
पहले से मौजूद ड्रोन इकोसिस्टम को मिलेगा विस्तार
आईआईटी कानपुर में पहले से संचालित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ड्रोन अनुसंधान, परीक्षण, प्रशिक्षण और स्टार्टअप प्रोत्साहन के क्षेत्र में काम कर रहा है। अब राष्ट्रीय सैन्य ड्रोन प्रौद्योगिकी हब के जुड़ने से यह संस्थान रक्षा क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप उन्नत तकनीकों के विकास का प्रमुख केंद्र बन जाएगा।
इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की नोडल एजेंसी के रूप में कार्यरत उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे राज्य सरकार ने 29 मई को रक्षा मंत्रालय को भेजा था।
डिफेंस कॉरिडोर को मिलेगी नई ताकत
यह केंद्र केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नागरिक और सैन्य दोनों क्षेत्रों में उपयोग होने वाली ड्रोन तकनीकों के विकास को भी बढ़ावा देगा। साथ ही रक्षा क्षेत्र में विनिर्माण, रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल से जुड़े कार्यों के लिए तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
कानपुर, लखनऊ, आगरा, झांसी, अलीगढ़ और चित्रकूट में विकसित किए जा रहे डिफेंस कॉरिडोर नोड्स को भी इस परियोजना से सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। अनुसंधान, विकास और मानकीकरण के क्षेत्र में यह केंद्र प्रमुख भूमिका निभाएगा।
रोजगार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे
विशेषज्ञों का मानना है कि नेशनल मिलिट्री ड्रोन टेक्नोलॉजी हब के जरिए प्रदेश में उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास और स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलेगी। इससे उत्तर प्रदेश रक्षा क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल हो सकता है।
