TMC में बड़ा सियासी भूचाल! 19 सांसदों के समर्थन का दावा, काकोली घोष के बयान पर कीर्ति आजाद का पलटवार

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है और कई सांसदों के बागी तेवरों ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच सांसद काकोली घोष दस्तीदार के ताजा बयान ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।

काकोली घोष का बड़ा दावा, NDA समर्थन की कही बात

बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार, जिन्होंने हाल ही में पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया था, ने दावा किया है कि बागी गुट ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का समर्थन करने का फैसला किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें करीब 19 सांसदों का समर्थन प्राप्त है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, दल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी भी टूट को वैध बनाने के लिए लोकसभा में पार्टी के कुल सांसदों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। ऐसे में 28 सांसदों वाली इकाई में कम से कम 19 सांसदों का साथ अहम माना जा रहा है।

दिल्ली में हुई बैठकों से बढ़ी अटकलें

सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को कम से कम 14 सांसदों ने दिल्ली में बैठक कर पार्टी से अलग होने की संभावनाओं पर चर्चा की। बताया जा रहा है कि इस बैठक में पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे। विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद यह घटनाक्रम पार्टी नेतृत्व के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।

दिलचस्प बात यह रही कि एक ओर पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी विपक्षी गठबंधन की बैठक में शामिल थीं, वहीं दूसरी ओर दिल्ली में बागी सांसदों की अलग रणनीतिक बैठकों का दौर जारी था। बताया गया कि काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में सांसदों के एक समूह ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की। बाद में यह समूह एक अन्य बैठक के लिए शताब्दी रॉय के आवास पर भी पहुंचा।

कीर्ति आजाद ने दावों को बताया मनगढ़ंत

इन घटनाक्रमों के बीच सांसद कीर्ति आजाद ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए बागी खेमे से जुड़ी खबरों और कथित सूची को फर्जी और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि सूची में शामिल कई लोगों ने किसी भी दस्तावेज या कागज पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है।

कीर्ति आजाद ने अपने बयान में यह भी कहा कि विपक्षी दलों के विधायकों और सांसदों को तोड़ने की कोशिश सफल नहीं हुई है और पार्टी को कमजोर करने की रणनीति विफल रही है।

सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे से और गहराया संकट

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय के राज्यसभा से इस्तीफे ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। उन्होंने पार्टी में भ्रष्टाचार और शासन व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उनके इस्तीफे के कुछ घंटों बाद ही बागी सांसदों की बैठकों की खबरें सामने आने से अटकलों का बाजार और गर्म हो गया।

बढ़ती बगावत से नेतृत्व पर दबाव

पार्टी के भीतर लगातार बढ़ती असहमति और सांसदों के अलग रुख ने तृणमूल कांग्रेस के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले दिनों में बागी सांसदों की अगली रणनीति और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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