दिल्ली-NCR की हवा हुई जहरीली, प्रदूषण बढ़ते ही GRAP-1 लागू, इन इलाकों में सबसे ज्यादा खराब हवा
दिल्ली: राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर की हवा खराब श्रेणी में पहुंच गई है। कई इलाकों में हवा में प्रदूषक तत्वों का स्तर बढ़ने से धुंध की परत दिखाई दे रही है। प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) का पहला चरण लागू कर दिया है। इसके तहत धूल और धुएं को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं।
कालिंदी कुंज में सबसे ज्यादा प्रदूषण, एम्स और इंडिया गेट के आसपास भी हवा खराब
सीपीसीबी के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कालिंदी कुंज में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 267 दर्ज किया गया। वहीं, एम्स के आसपास एक्यूआई 255 और इंडिया गेट क्षेत्र में 236 रहा। इन सभी स्थानों पर हवा खराब श्रेणी में दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में न्यूनतम तापमान करीब 19 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान लगभग 32 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। मौसम में बदलाव, हवा की गति और वातावरण में मौजूद नमी प्रदूषक तत्वों के फैलाव को प्रभावित कर सकती है।
पराली और पटाखों के धुएं से बढ़ सकती है परेशानी
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। इनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, खेतों में पराली जलाना और पटाखों से निकलने वाला धुआं शामिल हैं। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं भी इस मौसम में चिंता का विषय बनती हैं।
त्योहारों के बाद प्रदूषण की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, केवल त्योहार या किसी एक कारण को वायु गुणवत्ता में गिरावट के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। इसके लिए मौसम संबंधी परिस्थितियों और प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए GRAP-1 लागू
हवा की गुणवत्ता खराब होने के बाद ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के पहले चरण के तहत प्रदूषण नियंत्रण के उपाय लागू किए गए हैं। इनमें सड़कों की मशीनों से सफाई, धूल दबाने के लिए पानी का छिड़काव और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों का पालन कराना शामिल है।
इसके अलावा, निर्धारित नियमों के तहत कोयले और लकड़ी से चलने वाले तंदूरों तथा डीजल जनरेटरों के इस्तेमाल पर नियंत्रण के उपाय किए जाते हैं। संबंधित एजेंसियों को प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी जाती है।
क्या होता है AQI, किस स्तर पर कितनी खराब होती है हवा?
वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई के जरिए हवा में मौजूद प्रदूषकों के स्तर और उनसे जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों का आकलन किया जाता है। सीपीसीबी के निर्धारित मानकों के अनुसार, एक्यूआई की श्रेणियां इस प्रकार हैं।
0 से 50 तक एक्यूआई को अच्छा माना जाता है। 51 से 100 तक हवा संतोषजनक, 101 से 200 तक मध्यम और 201 से 300 तक खराब श्रेणी में आती है। वहीं, 301 से 400 तक बहुत खराब और 401 से 500 तक गंभीर श्रेणी मानी जाती है।
खराब हवा सेहत के लिए खतरनाक, बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी की सलाह
वायु प्रदूषण का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ सकता है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से सांस लेने में परेशानी, खांसी, आंखों में जलन और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को प्रदूषण अधिक होने पर बाहरी गतिविधियां सीमित रखने की सलाह दी जाती है। जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाला एन-95 मास्क इस्तेमाल किया जा सकता है। सुबह की सैर या व्यायाम के लिए बाहर निकलने से पहले अपने इलाके का एक्यूआई देखना भी उपयोगी है।
दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण की समस्या अक्सर गंभीर हो जाती है। ऐसे में हवा की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखना और प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का प्रभावी पालन कराना महत्वपूर्ण है।
